

दुनिया भर में हर साल 3-5 मिलियन लोग इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू की चपेट में आते हैं। इनमें से करीब 6.5 लाख लोगों की मौत भी हो जाती है। खासकर इन्फ्लुएंजा ए वायरस कई बार बड़ी महामारियों का कारण बन चुका है। अब वैज्ञानिकों ने यह समझने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है कि यह वायरस मानव कोशिकाओं के भीतर कैसे फैलता है और उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार कैसे नियंत्रित करता है। यह अध्ययन जर्नल नेचर माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
यूरोपियन मॉलेक्यूलर बायोलॉजी लेबोरेटरी (ईएमबीएल) हैम्बर्ग और लाइबनिज रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर मॉलेक्यूलर फार्माकोलॉजी (एफएमपी) के शोधकर्ताओं ने पहली बार यह पता लगाया है कि फ्लू वायरस संक्रमित इंसानी कोशिकाओं के अंदर मौजूद प्रोटीन के साथ किस तरह संपर्क बनाता है। वैज्ञानिकों ने एक खास तकनीक की मदद से यह देखा कि वायरस और इंसानी कोशिकाओं के प्रोटीन आपस में कैसे जुड़ते हैं और वायरस इस व्यवस्था का अपने पक्ष में कैसे इस्तेमाल करता है।
आमतौर पर जब वैज्ञानिक वायरस और कोशिकाओं के बीच होने वाली गतिविधियों का अध्ययन करते हैं तो उन्हें कोशिकाओं को तोड़ना पड़ता है। इसके बाद ही वे अंदर मौजूद प्रोटीन की जांच कर पाते हैं। लेकिन इस तरीके में एक समस्या होती है। कोशिका टूटने के बाद कई ऐसे संपर्क दिखाई दे सकते हैं जो असल में शरीर के अंदर कभी हुए ही नहीं थे। वहीं कुछ जरूरी और कमजोर संपर्क नष्ट हो जाते हैं।
इस समस्या को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने क्रॉस-लिंकिंग मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एक्सएल-एमएस) नाम की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक की खास बात यह है कि इससे संक्रमित कोशिका को तोड़े बिना ही यह देखा जा सकता है कि कौन सा प्रोटीन किसके संपर्क में है।
ईएमबीएल हैम्बर्ग के वैज्ञानिक ने बताया कि इस तरीके से पहली बार फ्लू वायरस और इंसानी कोशिकाओं के बीच होने वाले सीधे संपर्कों को उसी स्थिति में देखा गया, जैसी स्थिति संक्रमण के दौरान शरीर के अंदर होती है।
शोधकर्ताओं ने इसके बाद कंप्यूटर मॉडलिंग की मदद से यह भी समझने की कोशिश की कि वायरस और इंसानी प्रोटीन संरचनात्मक रूप से किस प्रकार एक-दूसरे के साथ जुड़ते हैं। इसके लिए उन्होंने अल्फाफोल्ड तकनीक के एक विशेष रूप का इस्तेमाल किया। यह वही तकनीक है जो प्रोटीन की संरचना समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अध्ययन में दो महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए। पहला, वायरस का प्रमुख प्रोटीन हीमैग्लूटिनिन मानव कोशिकाओं के भीतर किस प्रकार अपना मार्ग बनाता है। यही प्रोटीन वायरस को कोशिका से जुड़ने और उसके भीतर प्रवेश करने में मदद करता है।
शोध में पाया गया कि मानव कोशिकाओं के कुछ प्रोटीन हीमैग्लूटिनिन को सही ढंग से तैयार होने और उसकी संरचना विकसित करने में सहायता करते हैं। इनमें से कुछ प्रोटीन की भूमिका के बारे में पहले बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में वायरस रोधी दवाओं के नए लक्ष्य विकसित करने में सहायक हो सकती है।
दूसरा महत्वपूर्ण निष्कर्ष कोशिका के केंद्र (न्यूक्लियस) में मौजूद पैरास्पेक्ल्स से जुड़ा है। अध्ययन में पाया गया कि इन्फ्लुएंजा ए वायरस संक्रमण के दौरान इन संरचनाओं को विघटित कर देता है।
पैरास्पेक्ल्स कोशिका के न्यूक्लियस में मौजूद ऐसे ढांचे होते हैं जो कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। इनमें आरएनए से जुड़े प्रोटीन मौजूद होते हैं। वायरस संक्रमण के दौरान इन पैरास्पेक्ल्स को तोड़ देता है, जिससे अंदर मौजूद प्रोटीन बाहर निकल जाते हैं और वायरस उनका इस्तेमाल अपनी संख्या बढ़ाने के लिए कर सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि पैरास्पेक्ल्स को खत्म करने से वायरस को दोहरा फायदा मिलता है। एक तरफ उसे अपनी बढ़ोतरी के लिए जरूरी संसाधन मिल जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ कोशिका की वायरस से लड़ने वाली प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तरीका सिर्फ फ्लू वायरस तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इसका इस्तेमाल दूसरे खतरनाक वायरस को समझने के लिए भी किया जा सकता है, जिनमें महामारी फैलाने की क्षमता रखने वाले वायरस भी शामिल हैं। [SP]
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)