गर्भाशय को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये 4 आसान उपाय, हार्मोन संतुलन से प्रजनन क्षमता तक मिलेगा लाभ

गर्भाशय किसी भी महिला के शरीर का सबसे जरूरी अंग है, जो हॉर्मोन बनाने से लेकर उन्हें संतुलित करने का काम करता है। अगर गर्भाशय में किसी भी प्रकार की परेशानी है तो सबसे पहले महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
गर्भाशय किसी भी महिला के शरीर का सबसे जरूरी अंग है
गर्भाशय किसी भी महिला के शरीर का सबसे जरूरी अंग हैIANS
Author:
Published on
Updated on
2 min read

गर्भाशय किसी भी महिला के शरीर का सबसे जरूरी अंग है, जो हॉर्मोन बनाने से लेकर उन्हें संतुलित करने का काम करता है। अगर गर्भाशय में किसी भी प्रकार की परेशानी है तो सबसे पहले महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक में गर्भाशय की विशेष देखभाल के तरीके बताए गए हैं। अगर गर्भाशय में किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो थायरायड और मोटापे के अलावा महिलाओं को सिस्ट, मासिक चक्र में बदलाव और प्रजनन क्षमता में कमजोरी की शिकायत होती है।

ऐसे में हर महिला को गर्भाशय की विशेष देखभाल करनी चाहिए। आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक में गर्भाशय की विशेष देखभाल के तरीके बताए गए हैं, जिससे प्रजनन तंत्र को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। पहला तरीका है सोने से पहले शांति और हल्की गर्मी का वातावरण। सोने से पहले आस-पास के वातावरण को शांत करें और हल्की लाइट में मन और शरीर दोनों को शांत करने की कोशिश करें। रात के समय शरीर खुद की मरम्मत के काम पर लग जाता है और आम यानी टॉक्सिन को निकालने का काम करता है।

ऐसे में गर्भाशय के हीलिंग का काम भी शुरू हो जाता है। दूसरा तरीका है गर्माहट देना। मासिक चक्र के दौरान गर्भाशय का संकुचन तेजी से होता है और वापस सामान्य होने में समय लगता है। ऐसे समय में हॉर्मोन परिवर्तन के साथ हल्के दर्द और सूजन का अनुभव होता है। इसके लिए हफ्ते में कम से कम दो बार गर्भाशय पर पानी की गर्म बोतल से सिकाई जरूर करें। इससे गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ऐंठन भी कम होती है। तीसरा तरीका है खाना खाने के बाद खुद को शांत रखना।

खाने के बाद शरीर की ऊर्जा को पाचन तंत्र और गर्भाशय की तरफ भेजने की कोशिश करें और शरीर की हर सांस को महसूस करें। इससे यूट्रस में जमा हो रही गंदगी निकलती है और रक्त का प्रवाह भी तेज होता है। इसके लिए खाने के कुछ समय बाद व्रजासन में बैठें। चौथा तरीका है पीठ के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया में सर्कुलर मोशन में मसाज करना। मसाज के लिए बादाम या जैतून का तेल ले सकते हैं। रोजाना रात को हल्के हाथ से पीठ के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया में हल्की मसाज करें। इससे रक्त का प्रवाह कम होगा और मांसपेशियों को आराम मिलेगा। [SP]

गर्भाशय किसी भी महिला के शरीर का सबसे जरूरी अंग है
"वजन कम करने के लिए फलों का सहारा: सुबह खाली पेट खाएं ये 6 प्राकृतिक फल"

Related Stories

No stories found.
logo
www.newsgram.in