मौसम बदलते ही बढ़ती है सूखी खांसी, जानें इसके आसान उपाय

इन दिनों मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। दिन में गर्मी और रात में ठंडी हवाएं... इसका असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है। इससे नाक, गला और फेफड़ों में संक्रमण और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसी मौसम में अक्सर लोग सूखी खांसी की समस्या से जूझते हैं। सूखी खांसी आमतौर पर वायरल इन्फेक्शन, एलर्जी या गले में सूजन के कारण होती है। कुछ सरल उपाय और सही दिनचर्या अपनाकर आप इसे आसानी से कम कर सकते हैं।
सूखी खांसी आमतौर पर वायरल इन्फेक्शन, एलर्जी या गले में सूजन के कारण होती है।
इन दिनों मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। दिन में गर्मी और रात में ठंडी हवाएं... इसका असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है। इससे नाक, गला और फेफड़ों में संक्रमण और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसी मौसम में अक्सर लोग सूखी खांसी की समस्या से जूझते हैं। सूखी खांसी आमतौर पर वायरल इन्फेक्शन, एलर्जी या गले में सूजन के कारण होती है। कुछ सरल उपाय और सही दिनचर्या अपनाकर आप इसे आसानी से कम कर सकते हैं। AI Generated
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इन दिनों मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। दिन में गर्मी और रात में ठंडी हवाएं... इसका असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है। इससे नाक, गला और फेफड़ों में संक्रमण (lung infection) और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसी मौसम में अक्सर लोग सूखी खांसी (dry cough) की समस्या से जूझते हैं। सूखी खांसी आमतौर पर वायरल इन्फेक्शन (viral infection), एलर्जी या गले में सूजन के कारण होती है। कुछ सरल उपाय और सही दिनचर्या अपनाकर आप इसे आसानी से कम कर सकते हैं।

गुनगुना पानी: गले की सूजन और सूखी खांसी के लिए गुनगुना पानी (lukewarm water) पीना सबसे आसान उपाय है। गुनगुना पानी गले का सूखापन कम करता है और म्यूकस को पतला करके खांसी को नियंत्रित करता है। अगर इसमें हल्का सा नमक मिलाकर गरारे किया जाए तो यह गले की अंदरूनी जलन को तुरंत कम करता है।

शहद: आयुर्वेद में शहद (honey) को रोग नाशक माना गया है। यह न सिर्फ खांसी को शांत करता है, बल्कि गले में एक सुरक्षात्मक परत भी बनाता है। विज्ञान के अनुसार, शहद में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। आप सोने से पहले एक चम्मच शहद खा सकते हैं या गुनगुने पानी में मिलाकर पी सकते हैं। यह रातभर खांसी को कम कर गहरी नींद लेने में मदद करता है।

भाप: स्टीम (steam) इनहेलेशन। आयुर्वेद में इसे "श्वसन सुधारक” कहा जाता है। भाप गले और श्वसन मार्ग की जलन को कम करती है, म्यूकस को पतला करती है और सांस को आसान बनाती है। आप एक बर्तन में गर्म पानी लेकर उसकी भाप धीरे-धीरे सांस के माध्यम से अंदर लें। चाहें तो इसमें कुछ बूंदें तुलसी या पुदीने के तेल की डालें, जिससे गले और नाक दोनों की सफाई होती है और ठंडी खांसी का खतरा कम होता है।

प्रदूषण से बचाव: धूल, धुआं और प्रदूषण से बचाव भी बेहद जरूरी है। जब खांसी हो तो स्मोकिंग और धुएं वाले इलाकों के पास जाने से बचना चाहिए। प्रदूषण और धूल गले को और ज्यादा जलाते हैं और खांसी को बढ़ा देते हैं। घर में हवा साफ रखने के लिए वेंटिलेशन सही रखें और नमी के लिए हल्की ह्यूमिडिटी बनाए रखें।

ज्यादा तला हुआ खाना: आयुर्वेद और विज्ञान (ayurved & science) दोनों मानते हैं कि आहार और दिनचर्या भी बहुत अहम हैं। ज्यादा तला हुआ (oily food), बहुत ठंडा या मसालेदार खाना खांसी को बढ़ा सकता है। इसके बजाय हल्का, पोषक और गर्म खाना लें। अदरक, काली मिर्च, हल्दी और तुलसी जैसी जड़ी-बूटियां गले की सूजन और खांसी कम करने में मदद करती हैं। हल्दी वाला दूध या अदरक वाली चाय रात में पीने से खांसी जल्दी शांत होती है और नींद अच्छी आती है।

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