बर्निंग फीट सिंड्रोम : पैरों की जलन के पीछे बड़े कारण, गंभीर बीमारियों का भी 'खतरा'

अक्सर लोग पैरों में होने वाली जलन को छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार, अगर यह समस्या बार-बार हो रही हो या फिर लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकती है।
बर्निंग फीट सिंड्रोम
बर्निंग फीट सिंड्रोम IANS
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अक्सर लोग पैरों में होने वाली जलन को छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार, अगर यह समस्या बार-बार हो रही हो या फिर लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक, पैरों में लगातार जलन सिर्फ एक सामान्य लक्षण नहीं, बल्कि नसों, हार्मोन या शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं का इशारा भी हो सकता है। इसी कारण इस संकेत को समय रहते समझना बेहद जरूरी है।

मेडिकल भाषा में पैरों में जलन की इस स्थिति को बर्निंग फीट सिंड्रोम कहा जाता है। यह समस्या तब होती है, जब पैरों की नसों पर किसी कारण से असर पड़ता है। रिसर्च बताती है कि जब नसें सही तरीके से काम नहीं करतीं या उनमें सूजन आ जाती है, तो व्यक्ति को जलन, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा एहसास होने लगता है। कई मामलों में यह समस्या रात के समय ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे नींद भी प्रभावित होती है।

इस समस्या के पीछे सबसे आम कारणों में से एक डायबिटीज है। जब शरीर में लंबे समय तक शुगर का स्तर ज्यादा रहता है, तो यह छोटी नसों को नुकसान पहुंचाता है। इस स्थिति को पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है, जिसमें पैरों में जलन, सुन्नपन और झुनझुनी महसूस होती है। इसी तरह, किडनी से जुड़ी बीमारियों में शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जो नसों को प्रभावित करते हैं और जलन की समस्या पैदा कर सकते हैं।

विटामिन की कमी भी समस्या की एक बड़ी वजह मानी जाती है। खासकर विटामिन बी12 की कमी नसों के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करती है। जब शरीर में यह विटामिन कम हो जाता है, तो नसों की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है और पैरों में जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है। इसके अलावा, हाइपोथायरॉयडिज्म यानी थायरॉयड हार्मोन की कमी भी नसों की गति को धीमा कर देती है, जिससे यह समस्या हो सकती है। ब्लड सर्कुलेशन की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारण है।

जब पैरों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचता, तो वहां ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इससे पैरों में भारीपन, दर्द और जलन का एहसास हो सकता है। वहीं, कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियां, जैसे नर्व डैमेज या लंबे समय तक शराब का सेवन, भी नसों को प्रभावित करके इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं। सिर्फ बीमारियां ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतें भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक खड़े रहना, बहुत टाइट जूते पहनना, पैरों में ज्यादा पसीना आना या फंगल इन्फेक्शन जैसी स्थितियां पैरों में जलन को बढ़ा सकती हैं। [SP]

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