

आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त, लंबे समय से बनाई गई कथित रणनीति का परिणाम बताई जा रही है, जिसमें सीआईए और मोसाद की भूमिका होने का अनुमान है।
ईरान में पहले से चल रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच खामेनेई की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर 28 फरवरी 2026 की बैठक को निशाना बनाया गया।
इस युद्ध ने वैश्विक राजनीति को एक नई दिशा दे दिया है, ऐसा कहना गलत नहीं होगा।
अमेरिका-ईरान संघर्ष में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत से पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है। खामेनेई के मारे जाने के पश्चात भारत सहित अन्य देशों के मुसलमानों में अमेरिका के प्रति और इजरायल के प्रति नाराजगी देखने को मिली। खासकर शिया समुदाय के लोगों के भीतर शोक और आक्रोश दोनों भरा है।
कुछ देशों के प्रमुखों ने बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्वक समाधान निकालने की बात कही है। लेकिन अमेरिका द्वारा खामेनेई को मारना एक दिन का काम नहीं था बल्कि इसकी सिलसिलेवार तरीके से योजना बनाई गई थी। अमेरिका के इस योजना का मुख्य साझेदार इजरायल था। दोनों ने मिलकर इस काम को अंजाम दिया है।
ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) को मारने की योजना एक दिन में नहीं बनाई गई। यह योजना अमेरिका की सीआईए (CIA) और इजरायल के मोसाद (Mossad) खुफिया जांच एजेंसियों ने मिलकर अंजाम दिया है, ऐसा विशेषज्ञों का अनुमान है। गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल बहुत पहले से ईरान पर निगाहें लगाकर बैठा था और खामेनेई की मौत का खाका तैयार कर रहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के जासूस कई वर्षों से आयतुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) पर नजर रख रहे थे। खामेनेई कहाँ जाते हैं, किससे मिलते है, इसके साथ ही उनके दिनचर्या पर इजरायल के जासूसों की नजर लगातार बनी हुई थी।
रिपोर्ट में सीआईए (CIA) के सेवानिवृत्त अधिकारी रुएल गैरेचट के मुताबिक इजरायल ने जमीनी स्तर पर अपने जासूस तैनात करने के लिए काफी मशक्कत की थी। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि इजरायल ने 20 साल पहले अपने रणनीति में बदलाव करते हुए स्थानीय जासूसों को भर्ती करना शुरू किया था।
डेविड बार्निया जो कि मोसाद (Mossad) के डायरेक्टर भी रह चुके हैं, के मुताबिक स्थानीय एजेंटों की भर्ती कर पाना काफी आसान था क्योंकि ईरान में बहुत सारी लोग ऐसे थे जो तत्कालीन सत्ता के खिलाफ थे। ऐसे में स्थानीय एजेंट मिलना मुश्किल नहीं था।
ईरान में काफी समय से खामेनेई (Khamenei) की सत्ता के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन होता रहा। साल 2022 में महसा अमीनी (Mahsa Amini) नामक युवती को हिजाब न पहनने के कारण ईरान की नैतिकता पुलिस ने उसको हिरासत में ले लिया।
हिरासत में ही युवती की मौत 16 सितंबर 2022 को हो गई। इसके बाद पूरे ईरान में महिला अधिकार और मानवाधिकार को लेकर जमकर प्रदर्शन हुए। अमेरिका ने भी उस समय इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मानवाधिकार का उल्लंघन है। अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों का काफी समर्थन किया था।
इसके बाद ईरान में साल 2025 में ईरान में जमकर आंदोलन हुए। दिसंबर महीने में आर्थिक संकट (Economic Crisis) से जूझते हुए ईरान के नागरिकों ने सत्ता के खिलाफ आवाज को प्रदर्शन में तब्दील कर दिया।
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति की मुलाकात इजरायल के प्रधानमंत्री से हुई थी। उस समय अमेरिका ने भी ईरान के प्रदर्शनकारियों का फिर से समर्थन किया था। दोनों ने इसी समय काफी योजना पर बात की जिसमें ईरान भी एक मुद्दा था।
गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मोसाद की खुफिया जांच के तहत इजरायल लगभग एक साल पहले ही आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को मारने का प्लान था। इसी बीच अमेरिका के सीआईए और मोसाद ने मिलकर योजना बनाई।
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अमेरिका (America) की खुफिया जांच एजेंसी सीआईए (CIA) की नजर ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई पर पूरी तरीके से बनी हुई थी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी यह बात इशारों-इशारों में ही कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अमेरिका की नजरों से बचने में नाकाम रहे। अमेरिका का कहना है कि यह बहुत ही बढ़िया अवसर था खामेनेई को मारने का और अमेरिका यह अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहता था।
खबर के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर प्रायः हर शनिवार को अपने कारीबियों के साथ बैठकर परामर्श मीटिंग करते थे। खामेनेई अपने सलाहकारों के साथ कब,कहाँ और कितने समय पर मीटिंग करने वाले हैं, इसकी खबर मोसाद (Mossad) और सीआईए (CIA) को हो चुकी थी। 28 फरवरी 2026 को होने वाली बैठक की सारी खबर ईरान सरकार के भीतर से किसी ने इज़रायली खुफिया एजेंसी मोसाद को पहुंचा दी।
यह खबर जैसे ही मिली, इजरायल और अमेरिका ने रात की सारी योजना को दिन में पूरा करने का निश्चय किया और खामेनेई के कार्यालय परिसर पर अमेरिका ने अटैक कर दिया और खामेनेई की मौत हो गई।
अमेरिका के राष्टपाती डोनाल्ड ट्रम्प ने खामेनेई की मौत के बाद एक प्रेस वार्ता में यह बात कहा है कि यह संघर्ष कुछ दिन में ही खत्म हो सकता है अगर बात नहीं बनी तो फिर यह संघर्ष कई हफ्तो जारी रह सकता है।
उधर ईरान की तरफ से यह बयान पहले ही या चुका है कि अमेरिका ने युद्ध शुरू किया और ईरान इस युद्ध का अंत करेगा। इस संघर्ष का प्रभाव आगे भविष्य में किस तरीके से पड़ता है इसकी विवेचना में विश्लेषक लगे हुए हैं लेकिन इस युद्ध ने वैश्विक राजनीति को एक नई दिशा दे दिया है, ऐसा कहना गलत नहीं होगा।