

सैन निकोलस द्वीप से निकोलेनो जनजाति के पलायन के दौरान, जुआना मारिया एक आकस्मिक तूफान और जहाज के छूट जाने के कारण द्वीप पर अकेली रह गईं।
मारिया ने विपरीत परिस्थितियों में हार मानने के बजाय प्रकृति को ही अपना परिवार बना लिया। उन्होंने जीवित रहने के लिए पत्थरों में बारिश का पानी इकट्ठा किया, मछली की हड्डियों से सुई और घर बनाया, और जानवरों की खाल से वस्त्र तैयार किए।
1853 में जॉर्ज निडेवर के नेतृत्व में एक अमेरिकी दल ने उन्हें खोज निकाला। हालांकि, 18 साल के एकांत के बाद जब उन्हें कैलिफोर्निया के सांता बारबरा लाया गया, तो उनका शरीर और मन आधुनिक सभ्यता व नए वातावरण के अनुकूल नहीं हो सका।
आज के समय में हर किसी का शौक होता है कि किसी बड़े आइलैंड पर घूमने के लिए जा सके। जरा सोचिए अगर उसी आइलैंड पर अकेले रहना पड़े जहां कोई न रहता हो, यह बड़ा अजीब सवाल है लेकिन एक महिला ने अपने जीवन का 18 साल अमेरिका के सैन निकोलस द्वीप पर बिता दिया। जब यह बात लोगों को पता हुआ तो लोग हतप्रभ रह गए।
यह बात उस समय की है जब अमेरिका का सैन निकोलस द्वीप वीरान होता था। यह द्वीप ऐसा है कि यहाँ पर कोई नहीं रहता था लेकिन यह घटना 1835 की है जब इस द्वीप पर निकोलेनो जनजाति निवास करती थी। निकोलो जनजाति अपने जीवन यापन के लिए जंगल पर निर्भर थी। लगभग 200 से 300 के बीच उनकी जनसंख्या थी।
साल 1814 में मुसीबत के रूप में रूसी शिकारी द्वीप पर आए। यहाँ पर उन्होंने मार काट मचा दिया। निकोलो जनजाति की संख्या लगातार घट रही थी और उनका जीवन यापन मुश्किल हो रहा था। यह सिलसिला बहुत दिनों तक चला, इसी बीच द्वीप पर एक जहाज आया जो उन सभी लोगों को एक सुरक्षित जगह पर ले जाने वाली थी। सभी लोग उस जहाज पर सवार हो गए।
अचानक एक महिला ने जहाज को चलने से रोका और द्वीप की तरफ फिर से जाने लगी। महिला ने कहा कि थोड़ी देर में आती हूँ। इसी बीच समुद्र में तेज का तूफान आया और जहाज को वहाँ से निकलना पड़ा। महिला उस द्वीप पर अकेली रह गई। इस महिला का नाम जुआना मारिया था।
जहाज के जाने पर जुआना मारिया बहुत निराश तो हुई लेकिन उसने उस द्वीप को ही अपना घर बना लिया। इतने बड़े द्वीप पर जुआना मारिया का अकेले रहना बहुत मुश्किल था। समय के साथ जुआना मारिया ने प्रकृति द्वारा प्रदत्त सुविधाओं को पहचानना शुरू किया। जब उसे पता चला कि समुद्र का पानी पीने योग्य नहीं है तो वह बारिश का इंतजार करती थी।
जब बारिश होती थी तो जुआना मारिया पत्थरों का छोटा छोटा गड्ढा बनाकर पत्तों को बिछाकर पानी इकट्ठा करने का प्रयास करती थी। पेट भरने के लिए जुआना मारिया समुद्र के छोटी मछलियों को अपना शिकार बनाती थी। कई बार ऐसा होता था कि मछलियाँ नहीं मिलती थीं तो पेड़ के नरम जड़ों को उखाड़कर वह खा लेती थी।
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जुआना मारिया (Juana Maria) को समुद्र के किनारे बड़ी मछलियों की हड्डियाँ मिलीं। मारिया ने उन्ही हड्डियों के सहारे एक छोटी सी झोंपड़ीनुमा घर बनाया। अपने शरीर को ढकने के लिए मारिया ने मरे जानवरों की खाल को सहारा बनाया। छोटी और पतली बारीक हड्डियाँ जब सूख जाते तो वह उसे सुई के रूप में इस्तेमाल करती थी और अपना वस्त्र बनाने के लिए, कपड़ों को जोड़ने के लिए सुई के रूप में उसका इस्तेमाल करती थी।
आग जलाने की कला मारिया को पहले से पता था। यह कला उन्होंने अपने कबीले में ही सीख लिया था। आग जब एक बार जल जाती तो वह उसे जल्दी बुझने नहीं देती थी। इसी आग के सहारे वह समुद्र की मछलियों को भूनकर खाती थी। कई बार समय पर आग नहीं जल पाता तो मछलियों को धूप में सूखाकर खा लेती थी।
जुआना मारिया ने प्रकृति को बेहद करीब से समझ लिया था। यही कारण था कि वह अपने दिनचर्या को निर्धारित कर पाती थी। ज्वार-भाटा की कहानी वह बहुत अच्छे से समझ चुकी थी, इसलिए उसको मछलियों को पकड़ने में आसानी होने लगी थी। प्रकृति को ही जुआना मारिया ने अपना परिवार बना लिया था। वह समुद्र से बात करती थी। पक्षियों के भावनाओं को समझने का प्रयास करती थी। धीरे-धीरे मारिया का समय बीत रहा था और इसी तरह 18 साल बीत गए।
1853 में जार्ज निडेवर (George Nidever) के नेतृत्व में एक अमेरिकी दस्ता इस द्वीप की तरफ बढ़ा। उनका जहाज द्वीप के पास रुका तो वे हैरान रह गए थे। एक महिला जो इतने वर्षों से वहाँ रह रही थी अपनी भाषा में कुछ बोल रही थी लेकिन उसकी भाषा समझ नहीं आ रही थी। जार्ज निडेवर की टीम जुआना मारिया को जहाज मे बैठाकर ले गए।
इसके बाद जुआना मारिया को कैलिफोर्निया के साँटाबारबरा (Santa Barbara, California) लाया गया। जुआना मारिया बाहर के इस वातावरण को सहन न कर सकी। नई सभ्यता उसके अनुकूल नहीं थी। 19 अक्टूबर 1853 को उसकी मृत्यु हो गई। जुआना मारिया को जहां दफनाया गया उस जगह का नाम द लोन वूमेन ऑफ सैन निकोलस आइलैंड (Lonely Woman of San Nicolas Island) रखा गया। ऐसा कहा जाता है कि आज भी वहाँ की फिजाओं में मारिया के गीत सुनाई पड़ते हैं।
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