

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में चार और नागरिकों को गायब कर दिया गया है। ताजा घटना प्रांत में बढ़ती जबरन गुमशुदगियों और गैर-न्यायिक हत्याओं की पृष्ठभूमि में सामने आई है। ह्यूमन राइट्स संगठन ने कहा कि इस घटना के बाद से इलाके में जबरन गायब होने की घटनाओं पर नई चिंताएं बढ़ गई हैं।
बलूच नेशनल मूवमेंट के ह्यूमन राइट्स डिपार्टमेंट 'पांक' ने गुरुवार को केच जिले के तुर्बत के जूसाक इलाके से एक बलूच युवक, करीम, को गायब करने की कड़ी निंदा की।
मानवाधिकार संगठन ने कहा, ''दिनदहाड़े हथियारबंद लोगों और अज्ञात वाहनों से किए जा रहे अपहरण का यह पैटर्न बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों के लगातार और चिंताजनक रुझान को दर्शाता है। इस तरह की कार्रवाइयां स्वतंत्रता, सुरक्षा और विधिक प्रक्रिया के अधिकार जैसे मूलभूत मानवाधिकारों का उल्लंघन करती हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों में निहित हैं।”
पांक ने यह भी बताया कि 31 मार्च को तुरबत के मेन बाजार से एक बलोच छात्र, शायहक रहीम, को पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वाड की ओर से गायब कर दिया गया। संगठन ने कहा कि दिनदहाड़े हुई यह घटना क्षेत्र में भय और दंडमुक्ति के माहौल को दर्शाती है।
रहीम की सुरक्षा और कुशलता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए पांक ने कहा, ''अपहरण एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है, जो स्वतंत्रता, सुरक्षा और विधिक प्रक्रिया के अधिकारों को प्रभावित करता है। ऐसी घटनाएं न केवल परिवारों को तबाह करती हैं, बल्कि समुदायों में व्यापक मानसिक आघात भी पैदा करती हैं।”
एक अन्य मामले में नूर खान नामक एक छात्र को 28 मार्च को बलूचिस्तान के ग्वादर जिले के पासनी इलाके से पाकिस्तानी सेना के कर्मियों की ओर से गायब कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से पांक ने कहा कि नूर को दिनदहाड़े अगवा किया गया, जिससे प्रांत में छात्रों और नागरिकों को निशाना बनाए जाने के लगातार चल रहे पैटर्न पर गंभीर सवाल उठते हैं।
इसके अलावा, संगठन ने बताया कि एक अन्य छात्र समीर को 20 मार्च को ग्वादर से पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) की ओर से अगवा किया गया।
पांक ने पिछले दो महीनों से सेवानिवृत्त डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद बख्श साजिदी, उनके भाई नईम साजिदी और इंजीनियर रफीक बलोच (जो प्रांत में सूई गैस के पूर्व प्रमुख थे) के लगातार लापता रहने पर भी गंभीर चिंता जताई।
पांक ने कहा, ''यह मामला कोई अकेली घटना नहीं है। यह पाकिस्तान सरकार की सामूहिक सजा की बड़ी और सिस्टमैटिक पॉलिसी को दिखाता है, जहां असहमति को दबाने की कोशिश में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया जाता है।''
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)