जब गुमनामी में बीत रहे थे अभिनेत्री दुलारी के दिन, वहीदा रहमान बनीं थी सहारा

फिल्मी दुनिया में चमक-दमक और नाम के पीछे अक्सर कई ऐसी कहानियां छिपी होती हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
अभिनेत्री दुलारी
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फिल्मी दुनिया में चमक-दमक और नाम के पीछे अक्सर कई ऐसी कहानियां छिपी होती हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसी ही एक कहानी है अभिनेत्री दुलारी की, जिन्होंने सैकड़ों फिल्मों में काम कर अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन, जिंदगी के आखिरी दौर में उन्हें सहारे की जरूरत पड़ी, और उस समय अभिनेत्री वहीदा रहमान ने उनकी मदद के लिए आवाज उठाई।

दुलारी का जन्म 18 अप्रैल 1928 को हुआ था। उनका असली नाम अंबिका गौतम था। वह एक साधारण परिवार से थीं। पिता की तबीयत खराब रहने और घर की आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण उन्हें बचपन में ही परिवार की जिम्मेदारियों को उठाना पड़ा। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा।

उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म 'हमारी बात' से की। उस समय फिल्मों में काम करना आसान नहीं था, लेकिन दुलारी ने मेहनत और लगन से धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। उन्होंने करीब 135 फिल्मों में काम किया।

दुलारी ने कई यादगार फिल्में दीं, जिनमें 'जब प्यार किसी से होता है', 'मुझे जीने दो', 'अपना पराया', 'जीवन', 'तीसरी कसम', 'मजबूर' और 'दीवार' जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों में उन्होंने मां, चाची और परिवार के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। 1960 और 70 के दशक में वह लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं।

निजी जीवन में दुलारी ने साल 1952 में जे. बी. जगताप से शादी की। शादी के बाद उन्होंने करीब नौ साल तक फिल्मों से दूरी बना ली और अपने परिवार को समय दिया। बाद में उन्होंने फिर से फिल्मों में वापसी की और अपने करियर को आगे बढ़ाया। हालांकि उन्होंने कभी भी मुख्य अभिनेत्री के रूप में काम नहीं किया, लेकिन अपने किरदारों से उन्होंने हमेशा दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।

समय के साथ उनका करियर धीरे-धीरे खत्म होने लगा और उनकी आखिरी फिल्म 'जिद्दी' रही। इसके बाद वह पूरी तरह से फिल्मों से दूर हो गईं। जीवन के आखिरी सालों में उनकी हालत काफी कमजोर हो गई थी। वह अल्जाइमर नामक बीमारी से जूझ रही थीं और लंबे समय तक बिस्तर पर ही रहीं।

इसी दौरान उनकी स्थिति पर ज्यादा लोगों का ध्यान नहीं गया, लेकिन अभिनेत्री वहीदा रहमान ने उनकी हालत को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों के बाद सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन ने दुलारी को आर्थिक मदद देना शुरू किया। यह मदद उनके लिए उस समय बहुत जरूरी थी, जब वह पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो चुकी थीं। दुलारी का निधन पुणे के एक वृद्धाश्रम में हुआ। उन्होंने 84 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। [SP]

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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)

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