पुण्यतिथि विशेष : वीर सावरकर के संघर्ष को दिखाती हैं ये शानदार फिल्में

विनायक दामोदर सावरकर के जीवनी और संघर्ष पर बनी फिल्म हर भारतीय को उनको कालापानी में मिली यातनाओं के बारे में अवगत कराती है l
यह चित्र दामोदर विनायक सावरकर की है
वीर सावरकर के जीवनी पर बनी फिल्म एक बार हर भारतीय को जरूर देखनी चाहिए l IANS
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जब भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारियों के बारे में बातें होती हैं तो विनायक दामोदर सावरकर का नाम भी पूरे सम्मान के साथ लिया जाता है।

उनकी पुण्यतिथि के मौके पर हम बॉलीवुड में उनके संघर्ष को दिखाती फिल्मों और आइकॉनिक किरदारों के बारे में बात करेंगे, जिनकी चर्चा भले ही कम हुई, लेकिन सत्य की कहानी ने फैंस का दिल जरूर जीता।

वीर सावरकर पर हिंदी से लेकर मराठी भाषा तक में फिल्में बनी हैं, और क्षेत्रीय भाषाओं का प्रभाव ज्यादा देखने को मिलता है। पहले बात करते हैं रणदीप हुड्डा की फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' की, जिसे बनाने के लिए अभिनेता ने अपना घर भी बेच दिया था। फिल्म में सावरकर का रोल भी अभिनेता ने निभाया था और किरदार में जान डाल दी थी, हालांकि फिल्म का कलेक्शन औसत रहा है और फिल्म को कई तरह के विरोध-प्रदर्शन का भी सामना करना पड़ा था।

प्रियदर्शन की 'कालापानी' उन शुरुआती फिल्मों में से एक थी, जिनमें वीर सावरकर का जिक्र किया गया था। यह फिल्म उन भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में थी, जिन्हें ब्रिटिश राज ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कैद किया था। अनु कपूर ने सावरकर की भूमिका निभाई थी। 1996 में रिलीज हुई 'कालापानी' की गिनती मलयालम की क्लासिक फिल्मों में होती है।

साल 2001 में रिलीज हुई 'वीर सावरकर' भी यादगार फिल्म थी। रिलीज के बाद फिल्म का गुजराती वर्जन भी जारी किया गया था। फिल्म संगीतकार सुधीर फडके द्वारा सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान के तहत बनाई गई उनकी पहली जीवनी थी। शैलेंद्र गौर ने फिल्म में सावरकर की भूमिका निभाई थी, जिसका निर्देशन वेद राही ने किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म को बनाने के लिए चंदा इकट्ठा किया गया था और लोगों को सावरकर के प्रयासों से जागरुक भी किया गया था।

2015 में रिलीज हुई ‘व्हाट अबाउट सावरकर?’ को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। यह फिल्म वीर सावरकर पर आधारित नहीं है, लेकिन उनसे जुड़ी हुई है। मराठी भाषा में बनी यह फिल्म अभिमान मराठे की कहानी को दिखाती है, जो वीर सावरकर का अपमान करने वाले एक भ्रष्ट मंत्री के खिलाफ आवाज उठाता है। इस काम में उसके साथ दोस्त भी मंदिर का विरोध करते हैं। यह फिल्म सावरकर को सम्मान दिलाने की जंग को दिखाती है।

(VT)

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