

सलीम खान इस समय अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन उनके और जावेद अख्तर की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को हाथी मेरे साथी, जंजीर, दीवार, शोले और डॉन जैसी ऐतिहासिक फिल्में दीं, जिन्होंने बॉलीवुड की दिशा बदल दी।
जंजीर से अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ की पहचान मिली, जबकि दीवार और शोले के दमदार डायलॉग आज भी दर्शकों की जुबान पर हैं।
सलीम-जावेद की जोड़ी अपने दौर की सबसे सफल और महंगी लेखक जोड़ी मानी जाती थी, जिनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई कर हिंदी सिनेमा को नई ऊंचाई दी।
बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म लेखक सलीम खान (Salim Khan) इस समय अस्पताल में भर्ती हैं। 17 फ़रवरी 2026 की सुबह उनकी तबियत बिगड़ी, तो उन्हें लीलावती हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर जलील पारकर की देखरेख में सलीम खान का इलाज हो रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय सलीम खान (Salim Khan) को वेंटिलेटर पर रखा गया है, उन्हें मिनिमियल ब्रेन हैमरेज हुआ था, जिसमें सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है। डॉक्टर्स का कहना है कि उनकी सेहत में फिलहाल सुधार है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो उन्हें कल वेंटिलेटर से हटा दिया जाएगा।
बता दें कि सलीम खान (Salim Khan) एक ऐसे लेखक हैं, जिनकी फिल्मों की दीवानगी आज भी फैंस के बीच है। ऐसे में आज हम आपको उनकी 5 ऐसी फिल्मों के बारे में बताएंगे, जिसने बॉलीवुड को एक नई पहचान दी।
सलीम खान (Salim Khan) हिंदी सिनेमा के महान लेखकों में से एक हैं। जावेद अख्तर के साथ उनकी जोड़ी को लोग आज भी याद करते हैं। हिंदी सिनेमा के एक नाम उभकर सामने आया था, जिसे लोग सलीम-जावेद कहते थे। दोनों ने मिलकर ऐसी हिट फिल्में लिखी कि हिंदी सिनेमा की सूरत ही बदल गई। कहा जाता है कि ये जोड़ी अपने दौर की सबसे महंगी लेखकों की जोड़ी थी।
दोनों मिलकर अक्सर मुख्य अभिनेता की फीस से एक लाख ज्यादा ही चार्ज करते थे। आज 5 दशक बीत चुके हैं लेकिन दोनों के द्वारा लिखी गई फ़िल्में फैंस को काफी पसंद आती हैं। इन फिल्मों में जितना योगदान जावेद अख्तर था, उतना ही सलीम खान (Salim Khan) का भी था। ऐसे में आज हम ऐसी ही 5 सुपरहिट फिल्मों की चर्चा करेंगे।
ऐसा कहा जाता है कि साल 1971 में आई फिल्म 'हाथी मेरे साथी' ने सलीम खान (Salim Khan) को पहचान दिलाई। यह सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी की पहली आधिकारिक हिट फिल्म थी। इस फिल्म के मुख्य किरदार में राजेश खन्ना थे। उन्होंने इसकी पटकथा को सुधारने के लिए दोनों को जिम्मेदारी दी थी।
इस फिल्म की कहानी हाथी और उसके दोस्त राजू पर आधारित थी। सिनेमा में मुख्य अभिनेत्री तनुजा थीं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में इस फिल्म की कमाई 7 करोड़ के आसपास थी जबकि दुनिया भर में लगभग 16.35 करोड़ का कलेक्शन था।
साल 1973 में आई फिल्म जंजीर ने हिंदी सिनेमा को अमिताभ बच्चन के रूप में 'एंग्री यंग मैन' दिया। इस फिल्म में अमिताभ ने पुलिस इंस्पेक्टर विजय की भूमिका निभाई थी जहाँ वो समाज की बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़े थे। जंजीर ने अमिताभ बच्चन का करियर तो संवारा ही साथ ही साथ सलीम खान (Salim Khan) को भी शोहरत दिलाई।
शुरुआत में सलीम खान ने इसे 'पाप पुण्य'नाम दिया था लेकिन जब उन्होंने जावेद अख्तर के साथ मिलकर इस फिल्म पर काम किया, तो इसका नाम बदलकर जंजीर कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले इस फिल्म को धर्मेंद्र ने ख़रीदा था लेकिन वो इस प्रोजेक्ट से हट गए, जिसके बाद में प्रकाश मेहरा ने 55,000 रुपये इसे खरीदा। कहा जाता है कि जंजीर ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग ₹17.4 करोड़ की कमाई की थी।
'तुम लोग मुझे ढूंढ रहे हो और मैं यहाँ तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ", "मेरे पास मां है", "आज खुश तो बहुत होंगे तुम" ये मशहूर डायलॉग फिल्म दीवार के हैं जिसे सलीम-जावेद की जोड़ी ने लिखा है। यह फिल्म दो भाइयों, विजय (अमिताभ बच्चन) और रवि (शशि कपूर) की है, जिसमें अमिताभ जुर्म और तस्करी के रास्ते पर चलते हैं जबकि शशि पुलिस इंस्पेक्टर के किरदार में होते हैं।
कहानी का मुख्य केंद्र उनकी माँ (निरूपा रॉय) का संघर्ष रहता है और अंत में विजय अपनी मां की गोद में दम तोड़ता है। सलीम-जावेद को इस फिल्म के लिए ₹3 लाख मिले थे। दीवार ने भारत में लगभग 7.5 करोड़ की कमाई की थी।
"कुत्ते कमीने मैं तेरा खून पी जाऊंगा", "नौटंकी साला", "गब्बर खुश हुआ", ये डायलॉग फिल्म शोले के हैं, जिसकी गिनती 5 दशक के बाद भी नंबर 1 फिल्म में होती है। इस फिल्म में एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी और डाकुओं की कहानी दिखाई गई है। फिल्म की कहानी संजीव कुमार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्होंने पूर्व पुलिस ऑफिसर ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार निभाया था।
जब डाकू गब्बर सिंह (अमजद खान) उनके पूरे परिवार को मारने के बाद ठाकुर के दोनों हाथ भी काट देता है, तो वो गब्बर से बदला लेने के लिए शहर से जय (अमिताभ बच्चन) और वीरू (धर्मेंद्र) को बुलाते हैं। फिल्म में हेमा मालिनी बसंती के किरदार में होती हैं, जिनका धर्मेद्र के साथ रोमांस दिखाया गया है।
फिल्म को सलीम-जावेद की जोड़ी ने लिखा था। सलीम खान (Salim Khan) को इस फिल्म से काफी प्रसिद्धि मिली थी। कहा जाता है कि दोनों को 1.5 लाख से 2 लाख के बीच पैसे मिले थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में शोले ने 35 करोड़ की कमाई की थी। बता दें कि शोले उस दौर की सबसे महंगी फिल्म में से एक थी। शूटिंग के समय इसका बजट 1 करोड़ था लेकिन ये बढ़कर 3 करोड़ चला गया था।
"डॉन का इंतजार तो 11 मुल्कों की पुलिस कर रही है, लेकिन डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।" ये डायलॉग साल 1978 में आई फिल्म डॉन का था। इस फिल्म के मुख्य किरदार में अमिताभ बच्चन थे, जिन्होंने दो किरदार निभाए थे। अमिताभ ने डॉन के साथ विजय नामक व्यक्ति का भी किरदार निभाया था, जो बाद में मरे हुए डॉन की जगह लेते हैं और फिर उसके गुर्गो को पकड़वाने में पुलिस की मदद करते हैं। फिल्म में जीनत अमान मुख्य अभिनेत्री के तौर पर दिखीं।
सलीम-जावेद की जोड़ी जितनी हिट हुई, उतना ही अमिताभ बच्चन का करियर भी आगे बढ़ा। मानों ऐसा लगा कि ये तीनों एक दूसरे के लिए ही बने थे। कहा जाता है कि इस फिल्म को देव आनंद, जीतेंद्र और धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारों ने ठुकरा दिया था। भारत में इस सिनेमा ने लगभग 7 करोड़ के आसपास कमाई की थी। फिल्म का गाना 'खईके पान बनारस वाला' काफी हिट हुआ था।
तो ये थीं वो 5 ऐतिहासिक फ़िल्में सलीम खान (Salim Khan) और जावेद अख्तर (Javed Akhtar) की जोड़ी ने लिखा था, जिसे आज भी फैंस काफी पसंद करते हैं।