

अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म 'घूसखोर पंडत' के टाइटल को लेकर समाज के कुछ वर्ग काफी नाराज हैं। इस विवाद ने न केवल कानूनी और राजनीतिक मोड़ लिया है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। विवाद फिल्म के टाइटल को लेकर है, जिसमें 'पंडत' शब्द के इस्तेमाल को कुछ लोग अपमानजनक करार दे रहे हैं। इस कड़ी में मशहूर भजन और गजल गायक अनूप जलोटा ने अपनी राय रखी।
अनूप जलोटा (Anup Jalota) ने कहा, ''फिल्म 'घूसखोर पंडत' के टाइटल पर विवाद होना स्वाभाविक है। किसी जाति को सीधे तौर पर 'घूसखोर' कहने का मामला स्वीकार्य नहीं है। इस टाइटल से ब्राह्मण समुदाय को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने जैसा लगता है, और यह किसी भी धर्म या जाति के लिए अपमानजनक है।''
अनूप जलोटा ने इस समस्या का समाधान सुझाते हुए कहा, "टाइटल में छोटा सा बदलाव करके इसे विवाद से बचाया जा सकता है। अगर इसमें 'पंडत' की जगह 'पुजारी' शब्द इस्तेमाल कर दिया जाए, तो विवाद खत्म हो जाएगा। पुजारी कोई भी हो सकता है। यह शब्द किसी धर्म या जाति विशेष के लिए नहीं है। 'पुजारी' का मतलब है 'जो पूजा करता है।' इसमें किसी विशेष व्यक्ति या समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा रहा है।" उन्होंने कहा, '''घूसखोर पुजारी' टाइटल रखने से फिल्म का संदेश बना रहेगा और किसी समुदाय की भावनाएं भी आहत नहीं होंगी।'' फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका में हैं, जिसे फिल्म में 'पंडत' के नाम से बुलाया जाता है।
टाइटल के कारण मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), लखनऊ(Lucknow) और अन्य शहरों में ब्राह्मण समुदाय के लोगों के बीच आक्रोश है। वे फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा, मुंबई और लखनऊ में एफआईआर दर्ज की गई और दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में याचिका दाखिल की गई, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई।
वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेजा है। दूसरी तरफ विवाद बढ़ने पर निर्देशक नीरज पांडे ने भी आधिकारिक बयान जारी कर साफ किया कि यह एक पूरी तरह काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और 'पंडत' शब्द सिर्फ एक फिक्शनल किरदार का बोलचाल का नाम है। उन्होंने माना कि टाइटल से कुछ लोगों को ठेस पहुंची है और इसी कारण फिलहाल सभी प्रमोशनल सामग्री हटाने का फैसला लिया गया है।
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