

खान सर (Khan Sir) भारत के सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय शिक्षकों में से एक हैंl उनकी पढ़ाने की शैली अत्यंत सहज, सरल और काफी देसी अंदाज वाले हैं l इसी के चलते उन्होंने देश के करोड़ो छात्रों के दिल में अपनी जगह बना ली है l उनका कोचिंग सस्थान पटना सिटी में स्थित है, और वह उनका मुख्य सेंटर है l प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, BPSC, UPPSC,SSB,RRB,NDA और आदि सरकारी नौकरी सम्बंधित तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उनका संस्थान एक प्रमुख केंद्र बन चुका है l
खान सर (Khan Sir) का जन्म एक अत्यंत ही मध्यवर्गीय परिवार में हुआ l बचपन से ही उनको पढ़ाई में गहरी रुचि थी l आर्थिक तंगी और सीमित संसाधन कभी उनके लिए कोई समस्या नहीं थी l वो हमेशा चाहते थे कि वह स्वावलंबी बने और जल्दी ही अपने परिवार को इस आर्थिक मुसीबत से उबारे l वह हमेशा ही दूसरों की सहायता करना सेवाभाव मानते थे l
खान सर (Khan Sir) ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने पैत्रिक गाँव में पूरी की l आगे की पढ़ाई B.sc से स्नातक से किया l प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दरमियान उन्हें विज्ञान,इतिहास,भूगोल,राजनीति विज्ञान, आदि विषयों की गहरी समझ हो गई l
खान सर (Khan Sir) की सबसे बड़ी ताकत उनकी उनकी सरल और रोचक शिक्षण शैली है l वे कठिन विषयों को भी एकदम सरल भाषा में समझाने की उन्हें महारत हासिल है l उनकी कक्षाएं अभ्यर्थियों के लिए ना केवल ज्ञानवर्धक होती है बल्कि प्रेरणादायक भी l कम फीस और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के चलते वे ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के छात्रों के लिए एक मसीहा भी हैं l
भारत के शिक्षा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले प्रसिद्ध शिक्षक खान सर (Khan Sir) ने हाल ही में The Great Indian Kapil Show में अपनी जिंदगी से जुड़ा एक प्रेरक और चौंकाने वाला अनुभव साझा किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें एक समय 107 करोड़ रुपये का आकर्षक नौकरी का प्रस्ताव मिला था। यह ऐसा अवसर था, जो आमतौर पर किसी भी व्यक्ति के जीवन की दिशा पूरी तरह बदल सकता है।
प्रसिद्ध शिक्षक खान सर (Khan Sir) के जीवन का वह क्षण काफी चर्चा में रहा, जब उन्हें 107 करोड़ रुपये का एक बड़ा नौकरी प्रस्ताव मिला। यह ऑफर किसी भी व्यक्ति के लिए सपनों जैसा हो सकता था, लेकिन खान सर के लिए यह सिर्फ आर्थिक अवसर नहीं, बल्कि एक आत्ममंथन का समय था। 107 करोड़ रुपये जैसे आकर्षक प्रस्ताव को ठुकराना आसान नहीं होता, लेकिन खान सर ने साबित कर दिया कि जब लक्ष्य समाज की भलाई हो और नीयत साफ हो, तो व्यक्ति बड़े से बड़े प्रलोभन को भी त्याग सकता है। उनका यह कदम न केवल उनके समर्पण को दर्शाता है, बल्कि लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुका है।
(VT)