

हिंदी सिनेमा में किसी भी अभिनेता या अभिनेत्री के लिए सबसे बुरा होता है टाइपकास्ट होना। भले ही एक रोल में किसी भी अभिनेता को कितनी भी सफलता मिली हो, उसे अलग किरदार निभाने की भी इच्छा होती है। ऐसा ही कुछ बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी के साथ हुआ, जिन्हें अपनी सीरियल-किसर की छवि को बदलने में लंबा सफर और संघर्ष करना पड़ा था।
24 मार्च को जन्मे इमरान हाशमी का बॉलीवुड सफर 'सीरियल-किसर' की एक बंधी-बधाई छवि से निकलकर एक गंभीर और बहुमुखी अभिनेता बनने तक का रहा है। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि करियर के शुरुआती दशक में उन्होंने अपनी इस छवि का पूरा फायदा उठाया, लेकिन समय के साथ दर्शकों की बदलती पसंद को देखते हुए खुद को बदला। उनके लिए इस छवि को बदलना बहुत मुश्किल था, क्योंकि पर्दे पर 7-8 साल तक लगातार उन्होंने अपनी बैड-बॉय की इमेज को बरकरार रखा था।
यही कारण था कि उन्हें इस छवि को तोड़ने में काफी मेहनत करनी पड़ी थी। साल 2003 में अभिनेता ने फिल्म 'फुटपाथ' से अपने करियर की शुरुआत की थी, और उसके बाद फिल्म 'मर्डर' से इमरान रातोंरात चर्चा में आ गए। उन्होंने 'अक्सर', 'जहर' और 'आशिक बनाया आपने' जैसी फिल्मों में काम किया। अभिनेता को सफलता और पैसा दोनों खूब मिला। इमरान हाशमी ने स्वीकारा था कि उन्होंने सिनेमा में खुद को मजबूती से स्थापित करने के लिए इस इमेज का भरपूर फायदा उठाया था, लेकिन एक कलाकार के तौर पर वे अपनी ग्रोथ महसूस नहीं कर पा रहे थे।
फिल्म 'जन्नत' और 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' जैसी फिल्मों ने उनकी छवि को सुधारने में मदद की थी। अभिनेता के अभिनय में बड़ा टर्निंग पाइंट फिल्म 'आवारापन' से आया, जिसमें उन्होंने एक गंभीर और भावुक युवक का किरदार निभाया था, जिसके बाद 'जन्नत' और 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' जैसी फिल्मों से अभिनेता ने साबित कर दिया कि वे पर्दे पर सिर्फ रोमांस तक ही सीमित नहीं हैं। इमरान हाशमी के नेगेटिव किरदार को भी दर्शकों ने बहुत पसंद किया। उन्होंने 'टाइगर 3' में आतिश रहमान, 'एक थी डायन' में बिजॉय चरण माथुर और हालिया रिलीज फिल्म 'हक' में मोहम्मद अब्बास खान की भूमिका निभाकर फैंस की सोच को बदलकर रख दिया। [SP]