

दुनिया भर की चमक-दमक, सितारों की भीड़ और सुनहरे ट्रॉफी का सपना यही पहचान है अकादमी अवॉर्ड्स (Academy Awards) यानी ऑस्कर की। हर फिल्ममेकर के दिल में एक ख्वाहिश होती है कि उसकी फिल्म इस अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे और पूरी दुनिया उसे सराहे। भारत ने भी कई बार इस सपने को जीने की कोशिश की है। कभी हमारी फिल्मों ने कहानी, संगीत और अभिनय से दुनिया का दिल जीत लिया, तो कभी जीत से बस एक कदम दूर रह गईं। ये सफर सिर्फ अवॉर्ड का नहीं, बल्कि जुनून, मेहनत और सपनों का भी है। कुछ फिल्मों ने ऑस्कर जीतकर इतिहास रच दिया और तिरंगा गर्व से लहरा दिया, तो कुछ की मेहनत तालियों में सिमट कर रह गई। लेकिन हर कोशिश ने भारतीय सिनेमा को और ऊंचा उठाया।आइए जानते हैं ऐसी 5 भारतीय फिल्मों के बारे में, जो ऑस्कर तक तो पहुंचीं, लेकिन जीत नहीं सकीं, और साथ ही उन 4 फिल्मों के बारे में जिन्होंने देश का नाम रोशन किया।
नीरज घायवान द्वारा निर्देशित और ईशान खट्टर, विशाल जेठवा व जान्हवी कपूर अभिनीत फिल्म 'होमबाउंड' (Homebound) 26 सितंबर, 2025 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। होमबाउंड (Homebound) अभी रिलीज़ से पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई थी और इसे विदेशी फिल्म फेस्टिवल्स में सराहना मिली। हालांकि, इसे अभी तक ऑस्कर में आधिकारिक तौर पर भेजा नहीं गया, लेकिन इसे भविष्य की मजबूत कंटेंडर माना जा रहा है। इसकी कहानी सामाजिक मुद्दों और मानवीय रिश्तों पर आधारित है।
इस फिल्म का निर्देशन किरण राव ने किया है, जबकि इसे आमिर खान की प्रोडक्शन कंपनी ने बनाया। यह फिल्म 2024 के लिए भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री बनी थी (Best International Feature Film Category)। कहानी ग्रामीण भारत की दो दुल्हनों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गलती से एक-दूसरे से बदल जाती हैं। हल्के-फुल्के अंदाज़ में बनी यह फिल्म समाज की कई गहरी बातों को दिखाती है। हालांकि, यह फिल्म ऑस्कर में आगे नहीं बढ़ पाई और यहीं इसका सफर रुक गया।
इस फिल्म का निर्देशन मीरा नायर ने किया था। 1989 के ऑस्कर में इसे बेस्ट फॉरेन लेंग्वेज फिल्म (Best Foreign Language Film) के लिए नॉमिनेशन मिला था। फिल्म मुंबई की सड़कों पर रहने वाले बच्चों की जिंदगी को बहुत ही सच्चाई के साथ दिखाती है। यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराही गई, लेकिन अवॉर्ड नहीं जीत सकी।
1957 में रिलीज हुई यह फिल्म मेहबूब खान द्वारा निर्देशित थी। इस फिल्म को 1958 के ऑस्कर में बेस्ट फॉरेन लेंग्वेज फिल्म (Best Foreign Language Film) कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था। यह पहली भारतीय फिल्म थी जो ऑस्कर के इतने करीब पहुंची, लेकिन सिर्फ एक वोट से हार गई। यह फिल्म एक भारतीय महिला की संघर्ष और आत्मसम्मान की कहानी दिखाती है।
आशुतोष गोवारिकर द्वारा निर्देशित और आमिर खान द्वारा प्रोड्यूस की गई यह फिल्म 2001 में रिलीज हुई थी और 2002 के अकादमी अवॉर्ड्स में बेस्ट फॉरेन लेंग्वेज फिल्म (Best Foreign Language Film) कैटेगरी में नॉमिनेट हुई। कहानी ब्रिटिश शासन के समय एक गांव के किसानों की है, जो भारी लगान से बचने के लिए अंग्रेजों को क्रिकेट मैच की चुनौती देते हैं। फिल्म में संघर्ष, एकता और देशभक्ति का शानदार मेल देखने को मिलता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे खूब सराहना मिली, लेकिन यह ऑस्कर जीतने से चूक गई।
गांधी (Gandhi) 1982 में रिलीज़ हुई एक ऐतिहासिक फिल्म है, जिसका निर्देशन रिचर्ड एटनबरो (Richard Attenborough) ने किया था। यह फिल्म महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के जीवन और भारत की आज़ादी के संघर्ष को दर्शाती है। फिल्म को अकादमी अवॉर्ड्स (Academy Awards) में Best Picture सहित कुल 8 अवॉर्ड मिले। इसकी शानदार कहानी, बेहतरीन निर्देशन और Ben Kingsley की दमदार एक्टिंग ने इसे खास बनाया। फिल्म को इसलिए ऑस्कर मिला क्योंकि इसने गांधी जी के जीवन को बहुत ही सच्चाई और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया, जिससे यह दुनिया भर में सराही गई।
Slumdog Millionaire 2008 में रिलीज़ हुई एक लोकप्रिय फिल्म है, जिसका निर्देशन Danny Boyle ने किया था। यह फिल्म मुंबई के एक गरीब लड़के की कहानी पर आधारित है, जो “कौन बनेगा करोड़पति” जैसे शो में हिस्सा लेकर अपनी किस्मत बदलता है। फिल्म को अकादमी अवॉर्ड्स (Academy Awards) में कुल 8 अवॉर्ड मिले, जिनमें Best Picture भी शामिल है। इसकी शानदार कहानी, निर्देशन, संगीत और भावनात्मक प्रस्तुति ने इसे खास बनाया। ए. आर. रहमान (A. R. Rahman) ने इसके संगीत के लिए दो ऑस्कर जीते, जिससे फिल्म की लोकप्रियता और बढ़ गई।
जब देसी बीट्स ने पूरी दुनिया को झूमने पर मजबूर कर दिया, तब जन्म हुआ नातु नातु (Naatu Naatu) जैसे ऐतिहासिक गाने का। एस. एस. राजामौली (S. S. Rajamouli) की फिल्म RRR का यह गाना 2023 के अकादमी अवॉर्ड्स में बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग (Best Original Song) जीतकर भारत के लिए गर्व का पल बन गया। M. M. किरवानी के संगीत, राहुल सिप्लीगंज और काला भैरवा की आवाज, और राम चरण व एन. टी. रामाराव जूनियर. (N. T. Rama Rao Jr.) के जोशीले डांस ने इसे ग्लोबल सेंसेशन बना दिया। यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की जीत की गूंज बन गया।
जब इंसान और प्रकृति के बीच सच्चा रिश्ता परदे पर उतरता है, तो दिल खुद-ब-खुद जुड़ जाता है। कार्तिकी गोंसाल्वेस (Kartiki Gonsalves) की यह खूबसूरत डॉक्यूमेंट्री 2023 के अकादमी अवॉर्ड्स में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट फिल्म (Best Documentary Short Film) कैटेगरी में नॉमिनेट हुई और जीतकर इतिहास रच दिया। कहानी एक आदिवासी कपल - बोमन और बैली - की है, जो एक अनाथ हाथी के बच्चे ‘रघु’ की देखभाल करते हैं। प्यार, लगाव और प्रकृति के इस अनोखे रिश्ते को इतनी सादगी से दिखाया गया कि पूरी दुनिया भावुक हो गई। यह फिल्म भारत की संवेदनशील कहानी को वैश्विक मंच तक ले गई। [SP/MK]