ट्रंप टैरिफ का भारत पर पड़ा असर! आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में खुलासा, 10 पॉइंट्स में समझें पूरा मामला

कल यानी 1 फरवरी 2026 को निर्मला सीतारमण जो वर्तमान में वित्त मंत्री हैं, बजट पेश करेंगी लेकिन उससे पहले वो 29 जनवरी 2026 को संसद में 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' पेश कर चुकी हैं।
तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 रिपोर्ट X
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Summary
  • भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत और संतुलित राह पर

  • सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, MSME और AI पर

  • चुनौतियां भी बरकरार, लेकिन समाधान की दिशा साफ

9 जून 2006 को एक फिल्म रिलीज हुई थी, नाम था फिर हेरा फेरी। इस फिल्म में बाबू राव गणपत राव आप्टे का किरदार निभाने वाले परेश रावल का एक डायलॉग है, जिसे लोग आजकल मीम (MEME) के लिए इस्तेमाल करते हैं, जो कुछ इस प्रकार है ... 'मेरे को तो ऐसे धक-धक हो रे ला है।' भारत में लगभग लोगों की हालत ऐसी ही होगी। आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े बिजनेसमैन भी, सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे होंगे क्योंकि कल 1 फरवरी है और इस दिन भारत के वित्तमंत्री संसद के पटल पर सरकार के कामकाज का लेखा जोखा रखते हैं।

कल यानी 1 फरवरी 2026 को निर्मला सीतारमण (nirmala sitharaman) जो वर्तमान में वित्त मंत्री हैं, बजट पेश करेंगी लेकिन उससे पहले वो 29 जनवरी 2026 को संसद में 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' (economic survey 2025-26) पेश कर चुकी हैं। इसे भारत की अर्थव्यवस्था का वार्षिक आकलन बताया जाता है और यह आम तौर पर बजट से पहले संसद में प्रस्तुत किया जाता है। तो ऐसे में आइये समझते हैं कि इस आर्थिक सर्वेक्षण में क्या खास बात समाने आई है?

आर्थिक सर्वेक्षण से भविष्य की तस्वीर साफ़!

लोकसभा में पेश आर्थिक सर्वे के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत और संतुलित रास्ते पर आगे बढ़ रही है। FY27 में GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान है, जो स्थायी विकास का संकेत है। महंगाई काबू में रही है, इससे लोगों की खरीदारी की क्षमता बढ़ी है। बैंकों की स्थिति सुधरी है और NPA घटा है। विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत स्तर पर पहुंच गया है।

सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, MSME और रोज़गार सृजन पर है। हालांकि, भारत सरकार के लिए अभी भी विदेशी निवेश पर निर्भरता और वैश्विक अनिश्चितता अब भी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में आइये 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' (economic survey 2025-26) के 10 अहम पॉइंट्स पर नज़र डालते हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के 10 अहम पॉइंट्स

  1. आर्थिक विकास (GDP Growth): FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8%–7.2% रहने का अनुमान है। इससे यह तो साफ़ है कि अर्थव्यवस्था स्थिर गति से बढ़ रही है। GDP Growth का ग्राफ तेज तो नहीं हैं लेकिन बहुत ज्यादा ख़राब भी नहीं है। केंद्र की मोदी सरकार इस बात पर ज्यादा जोर दे रही है कि विकास ऐसा हो, जो लंबे समय तक देश के लिए फायदेमंद हो।

  2. महंगाई पर काबू: अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 तक भारत में महंगाई सिर्फ 1.7% रही। नतीजा यह रहा कि आम लोगों की जेब पर दबाव कम हुआ। खाने-पीने और ज़रूरी सामान सस्ते रहे। लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ी। खपत बढ़ने से अर्थव्यवस्था स्तिथि बेहतर रही।

  3. बैंकों की हालत में सुधार: बैंकों की बात करें तो, NPA घटकर 2.2% रह गया है। इसका मतलब है कर्ज़ वापस आने लगा है। बैंक अब ज़्यादा सुरक्षित स्थिति में हैं। इसके साथ ही नए कर्ज देने की क्षमता बढ़ी है। इससे बिजेनस और निवेश में फायदा होगा।

  4. विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत: 23 जनवरी 2026 को सप्ताह समाप्त होने तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 709.41 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time high) पर पहुंचा था। वहीं, 29 जनवरी 2026 को पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में 16 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर इसे 701.4 अरब डॉलर बताया गया। यह लगभग 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। इससे रुपये पर दबाव कम रहेगा।

  5. इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर: आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक सरकार हाईवे, रेलवे और एयरपोर्ट पर निवेश कर रही है। इससे रोज़गार के नए अवसर बनेंगे। लॉजिस्टिक्स सस्ता और तेज़ होगा और उद्योगों को बेहतर सुविधाएं मिलेगी।

  6. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेज़ी देखी जा रही है। PLI जैसी योजनाओं से कंपनियों को बढ़ावा मिला है। भारत में उत्पादन बढ़ रहा है और आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। ऐसे में निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।

  7. सर्विस सेक्टर की मजबूती: सेवाएं GDP का आधे से ज़्यादा हिस्सा देती हैं। इसमें IT, बैंकिंग और टूरिज़्म शामिल हैं। इस सेक्टर में लगातार रोज़गार पैदा हो रहे हैं, जिससे शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों को भी फायदा हो रहा है। इसने आर्थिक ढांचे को मजबूत करने का काम किया है।

  8. MSME पर फोकस: इस आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक छोटे उद्योगों पर खास ध्यान दिया गया है, जिससे सस्ता कर्ज़ और सरकारी मदद मिल रही है। MSME सबसे ज़्यादा रोज़गार देते हैं। इससे ग्रामीण और कस्बाई अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। साथ ही आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिल रहा है।

  9. विदेशी पूंजी पर निर्भरता: भारत अब भी विदेशी निवेश पर काफी निर्भर है। ये एक चिंता का विषय है। इससे कर्ज़ महंगा हो सकता है। रुपये पर दबाव बने रहने के आसार हैं, जिसका असर वैश्विक संकट का असर पड़ सकता है। सरकार इसे कम करने की कोशिश में है।

  10. भविष्य की रणनीति: सरकार ने ज़्यादा मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट पर ज़ोर दिया है। सस्ती पूंजी और मज़बूत संस्था को जरूरी बताया है। नीतियों में स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित है। निजी निवेश को बढ़ावा देना लक्ष्य है ताकि भारत को स्मार्ट और भविष्य के लिए तैयार किया जा सके।

AI को बढ़ावा देगी सरकार

'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' (economic survey 2025-26) के मुताबिक भारत सरकार AI को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। भारत की जरूरतों और लेबर मार्केट के हिसाब से लागू करेगी और सुनिश्चित करेगी कि प्रोडक्टिविटी बढ़े और रोजगार सुरक्षित रहे।

सही तरीके से AI इस्तेमाल हो, तो रोजगार बढ़ेंगे और देश आत्मनिर्भर बनेगा लेकिन इसका इस्तेमाल सही तरीके से नहीं हुआ, तो भारत में नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए सरकार स्किल डेवलपमेंट, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग पर ध्यान देगी, ताकि युवा और कर्मचारी नई तकनीक के लिए तैयार हो सकें।

क्या ट्रंप टैरिफ का असर पड़ा?

'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' (economic survey 2025-26) में साफ़ बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के कारण भारत के कपड़ा उद्योग, जेम्स एंड ज्वैलरी और लेदर सेक्टर पर बुरा असर पड़ा है। अच्छी आर्थिक स्तिथि होने के बावजूद भी कई देशों को करेंसी और ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, यूरोपीय संघ से ऐतिहासिक व्यापार समझौता करने के बाद भारत की स्तिथि सुधर सकती हैं। भारत अब सीधे तौर पर अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेगा। केंद्र की मोदी सरकार 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण और ये क्यों जरूरी है?

आर्थिक सर्वेक्षण की बात करें तो ये देश की अर्थव्यवस्था की सालाना रिपोर्ट होती है। वित्त मंत्रालय का आर्थिक कार्य विभाग इसे तैयार करता है। इसमें बताया जाता है कि देश की आर्थिक स्थिति कैसी है, क्या सुधार हुए और क्या चुनौतियां हैं और यह जरूरी भी है ताकि सरकार सही नीतियां बना सके। आर्थिक सर्वे आम बजट से पहले पेश किया जाता है। बता दें कि बजट भविष्य की योजनाएं बताता है, जबकि सर्वे मौजूदा हालात का आकलन करता है।

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