

बजट 2026 पेश: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में लगातार नौवां बजट पेश किया। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल और आंतरिक सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया।
प्रमुख सेक्टरों को बड़ा आवंटन: रक्षा क्षेत्र को ₹7.85 लाख करोड़, शिक्षा को ₹1.39 लाख करोड़, स्वास्थ्य को ₹1.06 लाख करोड़, गृह मंत्रालय को ₹2.55 लाख करोड़ और रेलवे को ₹2.81 लाख करोड़ दिए गए। बजट में नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, शिक्षण संस्थान और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की घोषणाएं की गईं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज: पीएम मोदी और अमित शाह ने बजट को आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम बताया, वहीं विपक्षी नेताओं ममता बनर्जी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव ने बजट को गरीब, किसान और युवाओं के लिए निराशाजनक करार दिया।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 1 फ़रवरी 2026 बजट पेश किया। कड़ी सुरक्षा के बीच निर्मला सीतारमण संसद पहुंची और कैबिनेट मीटिंग के बाद सदन में बजट प्रस्तुत किया। इसी के साथ निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लगातार 9 बजट पेश करने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज़ करा लिया है। यह बजट साल 2047 तक विकसित भारत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वैश्विक आर्थिक परिवर्तन के इस दौर में वित्तीय चुनौतियों को ध्यान में रखा गया । सीतारमण ने अपने भाषण में अलग -अलग क्षेत्रों के विकास हेतु घोषणाएँ की हैं जो इस प्रकार हैं
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट घोषणा में रक्षा क्षेत्र हेतु 7.85 लाख करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने निर्मला सीतारमण को धन्यवाद देते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से पेश इस शानदार बजट के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं। यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है। साथ ही, यह बजट प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त आधार देता है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए समुचित प्रावधान किए गए हैं।"
उन्होंने कहा, "इस बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किए जाने पर मैं प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। 'ऑपरेशन सिंदूर' की ऐतिहासिक सफलता के बाद आए इस बजट ने देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के हमारे संकल्प को सुदृढ़ किया है।"
राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा कि इस साल हमारी सेनाओं के कुल पूंजीगत व्यय के लिए 2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष हमारी तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण का है। इसके लिए इस साल 1.85 लाख करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप हमारी सैन्य क्षमता और अधिक सशक्त होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा, "भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी इस बजट में प्रमुख स्थान मिला है। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत वर्तमान वर्ष की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करते हुए 12,100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के संतुलन को मजबूत करता है।"
बजट पेश करते हुए निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि देश को हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर में वैश्विक ताकत बनाने की दिशा में सरकार बड़े कदम उठाने की तैयारी में है। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने साफ कहा कि देश में मजबूत, समावेशी और आधुनिक हेल्थकेयर सिस्टम तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। वित्तमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को स्वास्थ्य क्षेत्र 106530.42 करोड़ रूपए आवंटित किया।
बजट में विदेशी मरीजों को भारत की ओर आकर्षित करने के लिए पारंपरिक चिकित्सा पर खास जोर दिया गया है। इसके तहत तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद बनाने और मौजूदा आयुष फार्मेसी व ड्रग टेस्टिंग लैब्स को अपग्रेड करने का प्रस्ताव है। आसान वीजा प्रक्रिया और कम लागत में बेहतर इलाज के विकल्पों के चलते मेडिकल वैल्यू टूरिज्म सेक्टर के 2026 तक 13.42 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह सेक्टर उच्च गुणवत्ता और किफायती वैश्विक हेल्थकेयर के लिए सरकार के “विकसित भारत” विजन की एक अहम नींव माना जा रहा है।
बजट 2026 में , रिसर्च, मेडिकल टूरिज्म, आयुष और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं हर पहलू को छूने की कोशिश की गई है। बता दें कि, पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ सेक्टर में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विकसित देशों की तुलना में आज भी भारत का स्वास्थ्य खर्च कम है।
गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) को बजट से 255233.53 करोड़ रूपए आवंटित किये गए। निर्मला सीतारमण का धन्यवाद देते हुए गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा, "बजट 2026-27 के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी जी ने सिद्ध किया है कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी सरकार का संकल्प है। इस बजट में न सिर्फ हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर नागरिक को सशक्त बनाने का एक स्पष्ट ब्लूप्रिंट है, बल्कि उसे प्रोत्साहन देने का एक जमीनी विजन भी है, जो उसे हर कदम पर मदद करेगा। विकसित भारत बजट एक ऐसे भारत के निर्माण का विजन है, जो विश्व में हर क्षेत्र में अग्रणी हो।"
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे जैसे बड़े विभाग की महत्ता को बताते हुए बजट 2026-27 में कहा कि 7 नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाये जाएंगे। जो इस प्रकार हैं
मुंबई से पुणे तक – महाराष्ट्र के इन दो बड़े शहरों के बीच सफर अब बहुत तेज होगा
पुणे से हैदराबाद तक – महाराष्ट्र और तेलंगाना को जोड़ने हेतु
हैदराबाद से चेन्नई तक – दक्षिण भारत हेतु महत्वपूर्ण
हैदराबाद से बेंगलुरु तक – आईटी हब बेंगलुरु और हैदराबाद के बीच तेज कनेक्शन
चेन्नई से बेंगलुरु तक – तमिलनाडु और कर्नाटक हेतु
दिल्ली से वाराणसी तक
वाराणसी से सिलीगुड़ी तक
बता दें की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में रेलवे हेतु 281377.32 करोड़ रूपए के आवंटन की घोषणा की है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 को दृष्टिहीन, दिशाहीन और झूठ से भरा बताया, जिसमें राज्य के लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया यह वित्तीय बजट 2026-27 पूरी तरह से दिशाहीन, दूरदर्शी, लक्ष्यहीन और कार्रवाईहीन है। अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। यह महिला-विरोधी, गरीब-विरोधी, किसान-विरोधी, युवा-विरोधी, आम-विरोधी, अनुसूचित जाति-विरोधी, अनुसूचित जनजाति-विरोधी, और अन्य पिछड़ा वर्ग-विरोधी है। शिक्षा क्षेत्र के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है। शिक्षा सब्सिडी में कमी आई है, सामाजिक सुरक्षा सब्सिडी में कमी आई है, और उर्वरक सब्सिडी में कमी आई है। यह पूरी तरह से झूठ का पुलिंदा है।
पश्चिम बंगाल को कोई धनराशि आवंटित न किए जाने का दावा करते हुए बनर्जी ने कहा कि उन्होंने बंगाल को एक पैसा भी नहीं दिया है। केवल एक ही कर है, जो जीएसटी है। वे हमारा पैसा ले रहे हैं और बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं कि वे हमें पैसा दे रहे हैं। यह हमारा पैसा है... इसलिए, उन्हें सरकार चलाने और देश को इस तरह बर्बाद करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "हमारे अन्नदाता किसान अभी भी सार्थक कल्याणकारी सहायता या आय सुरक्षा योजना का इंतजार कर रहे हैं। असमानता ब्रिटिश राज के समय के स्तर से भी आगे निकल गई है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं है और न ही एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और अल्पसंख्यक समुदायों को कोई सहायता दी गई है। वित्त आयोग की सिफारिशों का और अध्ययन करना होगा, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वे गंभीर वित्तीय तनाव से जूझ रही राज्य सरकारों को कोई राहत देंगी। संघवाद इसका शिकार हो गया है।"
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में युवा बेरोजगार हैं, मैन्युफैक्चरिंग गिर रही है, निवेशक पूंजी बाहर निकाल रहे हैं, घरेलू बचत तेजी से घट रही है और किसान संकट में हैं। वैश्विक स्तर पर आने वाले झटकों का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन बजट इन सभी मुद्दों को नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा बजट है जो पाठ्यक्रम सुधार (कोर्स करेक्शन) से इनकार करता है और भारत के असली संकटों के प्रति अंधा बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा, "आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम। हमने तो पहले ही कहा था :- सवाल ये नहीं है कि शेयर बाज़ार रविवार को खुलेगा, सवाल ये है कि और कितना गिरेगा। जब भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या होगी। हम तो भाजपा के हर बजट को 1/20 (एक बँटे बीस) का बजट मानते हैं क्योंकि वो 5% लोगों के लिए होता है। भाजपा का बजट, अपने कमीशन और अपने लोगों को सेट करने का बजट होता है। भाजपा का बजट, भाजपाई भ्रष्टाचार की अदृश्य खाता-बही होता है। इस बजट में न आम जनता का ज़िक्र है न फ़िक्र। महंगाई बेतहाशा बढ़ने पर भी इस बजट में जनता को टैक्स में छूट न देना, ‘टैक्स-शोषण’ है। अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर दस तरह की छूटें दी गईं हैं लेकिन बेकारी-बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली, खाली है। निराशाजनक, निंदनीय बजट !"