

केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में मंजूर की गई सेमीकॉन 2.0 और मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को लेकर उद्योग जगत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इंडस्ट्री संगठनों का मानना है कि ये दोनों योजनाएं भारत को केवल मोबाइल असेंबली केंद्र से आगे बढ़ाकर संपूर्ण सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करने में मदद करेंगी और 3.6 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित कर सकती हैं।
उद्योग निकायों के अनुसार, सेमीकॉन 2.0 के तहत 40 से 50 अरब डॉलर तक का नया निवेश आकर्षित होने की संभावना है, जिससे 2 से 3 लाख उच्च कौशल (हाई-स्किल्ड) रोजगार पैदा हो सकते हैं। वहीं, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) के जरिए देश में मोबाइल निर्माण को और गति मिलेगी, जिससे 60,000 अतिरिक्त प्रत्यक्ष नौकरियां बनने का अनुमान है। इस योजना से मोबाइल उत्पादन का कुल मूल्य बढ़कर लगभग 39 लाख करोड़ रुपए और निर्यात बढ़कर करीब 15 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपए और एमपीएमएस के लिए 62,500 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। उद्योग संगठनों का कहना है कि इन योजनाओं से घरेलू वैल्यू एडिशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति हासिल करेगा।
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) ने कहा कि सेमीकॉन 1.0 के तहत पहले ही 20 अरब डॉलर से अधिक के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट घोषित हो चुके हैं। अब सेमीकॉन 2.0 में सेमीकंडक्टर फैब, एडवांस पैकेजिंग, चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), स्किल डेवलपमेंट, मशीनरी और कच्चे माल पर अधिक जोर दिया गया है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर साझेदार बन सकेगा।
आईईएसए और एसईएमआई इंडिया के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 भारत के लिए नीति निर्माण से बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन की दिशा में निर्णायक कदम है। उनके अनुसार, पहले चरण ने भारत की विश्वसनीयता स्थापित की, जबकि दूसरा चरण देश की दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों पर खर्च 2028 तक लगभग 230 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की मजबूत स्थिति में है।
इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि सरकार की यह नीति निरंतरता भारत को सेमीकंडक्टर उद्योग में वैश्विक स्किल कैपिटल बनाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि डिजाइन, अनुसंधान, पूंजीगत उपकरण और कौशल विकास पर जोर देकर आईएसएम 2.0 भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करेगा।
वहीं, ऑप्टीमस इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (ओईएल) के चेयरमैन अशोक गुप्ता ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह योजना प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम की सफलता को आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार, यह नीति लंबे समय तक निवेशकों को भरोसा देगी, स्वदेशी तकनीक के विकास को बढ़ावा देगी और भारत को उन्नत मोबाइल फोन निर्माण के लिए वैश्विक पसंदीदा केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। [SP]
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)