सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार की हिन्दी भाषा में दायर याचिका

भारतीय सर्वोच्च न्यायलय

नई दिल्ली : बिहार के वकील इंद्रदेव प्रसाद ने सर्वोच्च न्यायलय में हिंदी भाषा में याचिका दायर की है। सर्वोच्च न्यायलय ने भी उनकी दलीलें सुनने के बाद उनकी याचिका को स्वीकार कर किया है।

आपको बता दें की हमारी न्याय व्यवस्था में आंग्ल भाषा में काम होता है। सर्वोच्च न्यायलय और सभी उच्च न्यायालयों में याचिका दायर करने के लिए और बहस करने के लिए मुख्य रूप से आंग्ल भाषा का ही इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब इंद्रदेव प्रसाद के प्रयासों के कारण सर्वोच्च न्यायलय में हिंदी भाषा की गूंज सुनाई देगी।

वकील इंद्रदेव प्रसाद 21 जनवरी को पटना हाईकोर्ट द्वारा एक लोकहित याचिका में पारित आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए थे। लेकिन हिंदी भाषा में लिखी याचिका को देख सुप्रीम कोर्ट का रजिस्ट्रार कार्यालय भड़क गया। उनसे याचिका को अंग्रेजी में अनुवाद करने के लिए कहा गया लेकिन इन्द्रदेव प्रसाद ने याचिका का अंग्रेजी में अनुवाद करने से इंकार कर दिया।

सु्प्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने हिंदी में याचिका देना को अच्छी बात कहा लेकिन संविधान के अनुच्छेद 348 के कारण हिंदी में याचिका स्वीकार नहीं कर सकने की अपनी बाध्यता को जाहिर कर दिया। याचिकाकर्ता प्रसाद भी हिंदी भाषा के प्रयोग पर ही डटे रहे।

याचिकाकर्ता प्रसाद ने भी रजिस्ट्रार कार्यालय को संविधान के अनुच्छेद 300,351, मूल अधिकार से जुड़े अनुच्छेद 13 एवं 19 के बारे में याद दिलाते हुए बताया कि हिंदी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। आखिरकार रजिस्ट्रार कार्यालय को उनकी बात माननी पड़ी।

याचिकाकर्ता प्रसाद पटना हाईकोर्ट में हिंदी में लिखी याचिका ही दायर करते हैं और हिंदी भाषा में ही बहस करते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में हिंदी में लिखी याचिका को स्वीकार करवाना एक चुनौती थी।अभी उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए तारीख तय नहीं हुई लेकिन अब ये तय है कि जल्द ही सर्वोच्च न्यायलय में हिंदी भाषा में बहस होगी जो हमारी न्याय व्यवस्था में एक नई शुरुआत होगी।(एजेंसीज से इनपुट)