सुब्रमण्यम स्वामी चाहते है केजरीवाल के खिलाफ भ्रस्टाचार का मुकदमा

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नई दिल्ली : गुरुवार को भाजपा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने भ्रष्टाचार के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी की मांग करते हुए दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग को ख़त लिखा।

उन्होंने कहा कि “ये बात साबित हो रही है कि एसकेएन एसोसिएट्स लिमिटेड और उसकी चार सहायक कंपनियों ने 5 अप्रैल 2014 को आम आदमी पार्टी को 50 लाख रुपये का भुगतान किया है।”

स्वामी ने आरोप लगाया है कि “28 दिसंबर 2013 से 14 फरवरी, 2014 तक मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान केजरीवाल और तत्कालीन वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने एम /एस एसकेएन एसोसिएट्स लिमिटेड को एक वैट डिफॉल्टर होने के बावजूद अवैध रूप से फायदा पहुँचाया था।”

आम आदमी पार्टी पर इस मामले में अपने कायदे-कानूनों को भी ताक पर रखने के आरोप लग रहे है। आप पार्टी को अगर 9,99,999 से अधिक की राशि किसी के द्वारा दी जाती है तो उस राशि के दानकर्ता और राशि के माध्यम की जाँच के लिए पार्टी ने कमेटी बना रखी है लेकिन इस मामले में ऐसा लग रहा है कि यह मामला ना तो उस कमेटी तक ही पंहुचा और ना कोई जाँच की गयी।

अपनी याचिका में स्वामी ने वैट बकाएदारों की एक सूची को भी संलग्न किया है जिन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, इसमें एसकेएन का नाम भी है और यह सूची केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार सँभालने(28 दिसंबर 2013) से सिर्फ 10 दिन पहले जारी की गयी थी।

उन्होंने कहा कि “मेरी जांच से पता चला है कि पहली बार सत्ता में आने के बाद केजरीवाल और वित्त मंत्री ने एसकेएन एसोसिएट्स लिमिटेड सहित इन बकाएदारों का दोहन शुरू कर दिया। दिल्ली सरकार में इस भ्रष्टाचार से निराश अधिकारियों ने मुझे सूचित किया कि अपने संवैधानिक कर्तव्यों को मानकर इन कंपनीयों से कर वसूल करने की जगह केजरीवाल और सिसोदिया ने इन बकाएदारों से पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया।”

उन्होंने आगे कहा कि “यह साबित हो रहा है कि एसकेएन एसोसिएट्स लिमिटेड और उसकी चार सहायक कंपनियों ने 5 अप्रैल 2014 को आम आदमी पार्टी को 50 लाख रुपये का भुगतान किया।”

उन्होंने आगे कहा कि “इन सभी गैर-ऑपरेटिव और बिना कोई उल्लेखनीय लाभ वाली कंपनियों ने आम आदमी पार्टी को कुल 2 करोड़ रुपये का भुगतान किया और इस ज़बरदस्त भ्रष्टाचार को व्यापक रूप से फरवरी 2015 के पहले सप्ताह में मीडिया द्वारा उठाया गया था।”

उन्होंने कहा कि “प्रथम दृष्टया यह मामला केजरीवाल और सिसोदिया द्वारा कार्यालय का दुरुपयोग और जनता के पैसे की हेराफेरी कर वैट चूककर्ता एसकेएस एसोसिएट्स लिमिटेड का पक्ष लेने का है। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 403, 406 और 420 की धारा 13 (1) (डी) के तहत आता है।”(एजेंसीज के हवाले से)