म्यांमार से मरीज पहुंचते हैं मणिपुर

सांकेतिक चित्र

इंफाल : म्यांमार के निवासी भी मणिपुर के सीमावर्ती जिलों के अस्पतालों में अपना इलाज करने के लिए आते हैं।

मणिपुर सरकार द्वारा सीमावर्ती अस्पतालों की हालत सुधारने, डॉक्टर और सहायक कर्मियों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों के सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों की हालत में सुधार किया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही एक सार्वजानिक स्वास्थ्य केंद्र में मोमबत्ती के उजाले में एक महिला का सफल प्रसव कराया गया।सीमावर्ती जिले उखरुल के दूसरे सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र में भी सामान्य ढंग से कामकाज शुरू हो गया है।

इन इलाकों में रहने वाले आदिवासी पहले असम राइफल्स के सैनिक अस्पताल के भरोसे रहते थे। इस क्षेत्र के अंदरूनी इलाकों में असम राइफल्स मैडिकल कैंप लगाकर सांप काटने के शिकार लोगों की जान बचाने के लिए प्रेस विज्ञप्ति भी जारी करती रहती है।

मणिपुर के परिवार कल्याण विभाग के निदेशक के. राव बताते हैं, “हमने रविवार के पोलियो कार्यक्रम में 3.50 लाख बच्चों को पोलियो डॉप पिलाने की योजना बनाई है। इसके लिए दूरदराज के पहाड़ी गांवों में दोपहिया वाहनों से चिकित्साकर्मियों को भेजा गया है।”

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्यकर्मी बस स्टैंड या बाजार में अपना कैंप लगाते हैं, जहां बड़ी संख्या में पड़ोसी देश म्यांमार के लोग अपने बच्चों को लेकर आते हैं।

म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में ज्यादातर डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी दूरदराज के गांवों में जाना नहीं चाहते हैं। इन इलाकों में डॉक्टर खुद इंफाल या उसके आसपास स्थित इलाकों में अपने घरों पर रहते हैं और उनकी जगह फार्मासिस्ट और नर्सो के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र चलाया जाता है।

म्यांमार के एक विस्थापित डॉक्टर विन ओ ने सीमावर्ती इलाके मोरेह के बाजार में अपना एक चार बिस्तरों वाला निजी अस्पताल खोला है, जहां म्यांमार के ग्रामीणों का इलाज किया जाता है। विन ओ लोकतंत्र समर्थक हैं और 1988 में पलायन कर मणिपुर आ गए थे।

मोरेह में तैनात सुरक्षा अधिकारी ने बताया की पुलिस अब म्यांमार के नागरिकों को यहां के अस्पतालों में इलाज कराने के लिए आने से नहीं रोकती। हालांकि पहले उन्हें रोका जाता था और कुछ को गिरफ्तार भी किया गया था लेकिन अब ऐसा नहीं है।

भारत सरकार की ‘पूर्व की ओर देखो’ नीति के मद्देनजर भारत सरकार द्वारा म्यांमार से संबंधों को ओर प्रगाड़ किया जा रहा है।

म्यांमार सरकार भी भारत सरकार के कदम से कदम मिलकर रिश्तों को एक नया रूप देने के लिए प्रयासरत है जैसे अब भारतीय पर्यटकों और व्यापरियों को सीमा से 5 किलोमीटर अंदर स्थित तमू तक जाने से नहीं रोका जाता है।

भारतीय नागरिकों को म्यांमार के सीमावर्ती इलाके तमू तक जाने के लिए वीजा या कागजात नहीं दिखने पड़ते है। केवल 10 रुपये का इमीग्रेशन शुल्क अदाकर भारतीय शाम तक म्यांमार के सीमावर्ती इलाके तमू में रह सकते हैं।(आईएएनएस)(फोटो साभार- एएफपी)