भारतीय अमेरिकी दंपत्ति ने संस्कृत भाषा के पुनरुद्धार के लिए शिकागो विश्वविद्यालय को दिया 35 लाख डॉलर का दान

शिकागो: एक भारतीय-अमेरिकी दंपत्ति ने शिकागो विश्वविद्यालय को योग और संस्कृत भाषा के अध्ययन के लिए एक प्राध्यापक पद की स्थापना में मदद के लिए 35 लाख डॉलर दान दिए है। यह प्राध्यापक पद भारतीय उपमहाद्वीप के अध्ययन को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

यह कदम हमारी संस्कृति और सभ्यता को पुनर्जीवित करने/बनाए रखने की दिशा में भारतीय मूल के लोगों द्वारा किए जा रहे भारी योगदान को दर्शता हैं।

विश्वविद्यालय की घोषणा के अनुसार, अनुपमा और गुरु रामकृष्णन संस्कृत प्राध्यापक(पद) द्वारा मुख्य रूप से प्राचीन शास्त्रीय भाषा पर काम किया जाएगा।

दिल्ली में शिकागो विश्वविद्यालय केंद्र में दक्षिण एशियाई भाषाओं और सभ्यताओं के प्राध्यापक और संकाय के निदेशक गैरी टब इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले प्राध्यापक होंगे।

मार्था टी रोथ, मानविकीय विभाग की डीन ने कहा कि “शिकागो विश्वविद्यालय दक्षिण एशिया की छात्रवृत्ति में अपनी उत्कृष्टता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।”

“गुरु और अनुपमा रामकृष्णन संस्कृत प्रोफसेरशिप हमे इस परंपरा को बनाए रखने के लिए अनुमति देता है और मुमकिन बनता है कि हम साहित्यिक,धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों के माध्यम से दक्षिण एशिया की सांस्कृतिक विरासत के अध्यन को जारी रख सके।”

“संस्कृत दक्षिण एशिया का सबसे पुरानी साहित्यिक भाषा है और यह शिकागो विश्वविद्यालय में सबसे लम्बे समय से पढाई जा रही दक्षिण एशियाई भाषा है। संस्कृत भाषा की पहली कक्षा 1892 में विश्वविद्यालय में आयोजित की गई थी।”

प्रोफ़ेसर टब का संस्कृत भाषा से सबसे पहले सामना हार्वर्ड विश्वविद्यालय में एक स्नातक के रूप में हुआ था। उन्होंने कहा कि “मैं संस्कृत भाषा की ओर आकर्षित हुआ क्यूकि इसकी पहुचं मानव विचारों के एक लंबे और समृद्ध इतिहास तक है।”

“संस्कृत वास्तव में दुनिया की बाकी भाषाओं से अलग है,एक शास्त्रीय भाषा होने के साथ-साथ यह ग्रंथों और इतिहास की एक असाधारण और व्यापक श्रेणी तक पहुँच प्रदान करती है।”

टब ने संस्कृत छात्रवृत्ति के समर्थन के लिए रामकृष्णन परिवार की प्रशंसा की। “यह इस प्राध्यापक पद के लिए सम्मान की बात है कि इसके साथ एक ऐसे परिवार का नाम जुड़ा है,जो संस्कृत अध्यन के प्रति गंभीरता और सम्मान रखते है।”

गुरु रामकृष्णन मेरु कैपिटल ग्रुप के एक संस्थापक भागीदार है। अनुपमा रामकृष्णन बेंगलुरू स्थित अगस्त्य फाउंडेशन एनजीओ की धन सलाहकार बोर्ड की सदस्य है जो ग्रामीण भारत में शैक्षिक कार्यक्रमों को चलता है।

रामकृष्णन ने कहा कि “हम संस्कृत भाषा के लिए सृजित इस पद के लिए निधि देकर खुश हैं,संस्कृत सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है जिसने दुनिया को वेद, उपनिषद, आध्यात्मिकता, कविता, संगीत और नृत्य में असाधारण रचनाएँ दी है।”

“संस्कृत भाषा में शिकागो विश्वविद्यालय की दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं ने उसे इस महत्वपूर्ण पहल में भागीदार के रूप में हमारी पहली पसंद बना दिया।”

विश्वविद्यालय नौ आधुनिक और दो शास्त्रीय भारतीय भाषाओं में शिक्षा प्रदान करता है, जिनमे मराठी और तेलुगू जैसी आमतौर पर कम पढाई जाने वाली भाषाएँ भी शामिल है। (आईएएनएस)