आन्दोलन की राजनीति में हरियाणा की छवि होती धूमिल

नीरज गुप्ता

पिछले कुछ सालो में जितने भी आंदोलन या प्रोटेस्ट हुए है उनमे अन्ना आंदोलन की विशालता देखते ही बनती थी! अप्रैल में जब आंदोलन शुरु हुआ तो मै जाना चाहता था मगर किसी कारणवश जा नहीं पाया! उसके बाद अप्रैल से लेकर 16 अगस्त के बीच में जो कुछ हुआ उसके बाद मै अपने आप को रोक नहीं पाया! अप्रैल 2011, अगस्त 2011, दिसंबर 2011, जुलाई 2012, निर्भया आंदोलन ना जाने ऐसे कितने मौके आये जब मै उस आंदोलन का हिस्सा बना!

इस आंदोलन में समाज का हर हिस्सा शामिल था! मगर युवाओ की खास भूमिका थी जो देश में फैले भ्र्ष्टाचार से त्रस्त और क्रोधित था! लेकिन इस आंदोलन की खास बात ये थी के 2 साल चले इस आंदोलन में कभी कोई हिंसा की खबर नहीं आई, पूरा देश आंदोलित था क्रोधित था मगर कही एक पत्थर नहीं चला ! कई बार मैंने देखा के कुछ युवा आपे से बाहर हो रहे थे तो आंदोलन के साथियो ने उनका साथ देने की बजाय उन्हें वही रोक दिया और आगे बढ़ चले ! शायद ये भी एक कारण था के इस आंदोलन को जनता की साथ और सहानुभूति मिली!

पिछले कुछ दिनों से हरियाणा में जो हो रहा है वो बेहद निंदनीय है, सरकारी आकड़ो के अनुसार 22000 करोड़ का नुक्सान हो चूका है लेकिन अभी भी ये थम नहीं रहा है!

स्कूल, घर, दुकान, मॉल, किसी को नहीं छोड़ा, ये कौन सा तरीका है प्रोटेस्ट करने का? किसको जला रहे हो? क्या मिल जायेगा जलाकर? और मिल भी गया तो क्या आपकी आत्मा को शांति पड़ेगी? क्या आपको उनकी हाय नहीं लगेगी जिनका आप नुक्सान कर रहे हो? क्या ये नुक्सान आपका नहीं है? सरकार से आपकी नाराजगी हो सकती लेकिन सरकार के बहाने, आम लोगो को नुकसान पहुचना कहा की बहादुरी है !

पूरी उम्र खप जाती है एक घर बनाने में और कई बार तो वो भी छोटी पड़ जाती है! जरा सोचिये जैसे आप दुसरो के घर जला रहे हो अगर पीछे से कोई भीड़ आपके घर आकर आपका घर जला दे तो आप पर क्या बीतेगी?

आपने स्कूलों को भी नहीं बक्शा, उन्होंने आपका क्या बिगाड़ा था ? चलो कल को आरक्षण मिल भी गया तो भी हर नौकरी के लिए “योग्यता” (minimum qualification ) चाहिए होती है जब स्कूल ही नहीं रहेंगे तो ये minimum qualification कहा से लाओगे! कल जब ये आंदोलन थम जायेगा तो आपके बच्चे किस स्कूल में जायेंगे और वहा क्या सीखेंगे?

क्यों हरियाणा की छवि पुरे भारत में और भारत की छवि पुरे विश्व में धूमिल कर रहे हो? क्यों हरियाणा के गौरवशाली इतिहास की छी-छा लेदर करवा रहे हो! कौन सा ऐसा क्षेत्र है जिसमे हरियाणा के बालक देश का नाम रोशन नहीं करते? युद्ध का मैदान हो या चाहे खेल का मैदान हो, कब्बडी, कुश्ती, क्रिकेट, एथेलेटिक्स किस में हरियाणा कम है?

अब कौन हरियाणा में अपनी कंपनी अपनी फैक्ट्री लगाना चाहेगा? कौन हरियाणा में अच्छे स्कूल या कॉलेज खोलना चाहेगा? जो पहले से है वही भागने की तैयारी कर रही है !

हरियाणा में एक कहावत है, “आ”, “बैठ”, “पी पाणी” , ये तीन चीज़ कदे मोल ना आणी! पानी तो अपने दुश्मन को भी मना नहीं करते और तुमने मुनक कैनाल तोड़ दी! इस से क्या मिल गया दिल्ली वाले प्यासे रह जायेंगे तो तुम्हे क्या मिल जायेगा ? क्या तुम्हारे रिश्तेदार,भाई बंधू, दोस्त वहा नहीं रहते ? और किसको दुखी करोगे ? किसी अमीर को ? नहीं यहाँ भी गरीब ही दुःख पायेगा अमीर तो बिसलेरी या किनले की बोतल खरीद लेगा!

जिनको राजनीती करनी है उनको करने दो तुम क्यों उनकी राजनीती का हिस्सा बन रहे हो ! ये कोई आज से हो रहा है क्या? बाटो और राज करो तो अंग्रेजो के ज़माने से चलता आ रहा है !

अब बस करो अब और हरियाणा को मत फूको, अब इस आग की लपटे दूसरे राज्यों में भी पहुंच रही है क्यों उन राज्यों के नुकसान का भी जिम्मा अपने सर ले रहे हो?

(नीरज गुप्ता पेशे से इंजीनियर है तथा समसामयिक मुद्दो पर लिखने में रूचि रखते हैΙ)(फोटो साभार- AP)

  • Ankit kumar

    अंकित कुमार

    मै सबसे पहले बता देना चाहता हूँ कि मैं भी एक जाट हूँ । लेकिन मैं आरक्षण के बिल्कुल खिलाफ हूँ और मैं अपने भाइयो से एक बात कहना चाहता हूँ कि अरे हमें लडाई लड़नी ही हैं तो उनके लिए लड़ाई लडो जिनका इस दुनिया में कोई नहीं हैं।हम सब ये तो सोच लेते है कि हमें आरक्षण नहीं मिला कभी हमनें ये भी सोचा है कि उन बेसहारा बच्चों का क्या जिनके लिए कोई आरक्षण मागंने वाला ही नहीं हैं।
    अरे यदि दम दिखाना है तो उन बच्चों को पढ़ाओ लिखिओ और उन्हें कामयाब बनाओ । फिर पता चलेगा कि हममें कितना दम हैं।
    धन्यवाद।

  • ankit22

    अंकित कुमार
    मैं सबसे पहले बताना चाहता हूं कि मैं भी जाट हूँ लेकिन आरक्षण के खिलाफ हूँ। अपने भाइयों से एक बात पूछना चाहता हूँ कि उनके लिए कौन आरक्षण की मांग करता है जिनका इस दुनिया में कोई नहीं हैं उन बेचारों को तो एक टाइम कि रोटी भी नसीब नहीं होती। यदि हम इतना जोश उन बच्चों की जिंदगी सवारने में लगाऐं तो अपने देश में कोई अनपढ़, बेरोजगार, बेसहारा, और गरीब नहीं रहेगा।
    एकबार सोच कर देखो कि हम कितना कर रहे है अपने देश के लिए।
    घन्यवाद।