बंगलौर में फिजी के छात्र महसूस कर रहे है असुरक्षा की भावना

फोटो साभार- thesun.co.uk

भीड़ के द्वारा विदेशी छात्रों को निशाना बनाए जाने की धमकी के बाद भारत के बंगलौर में स्थित आचार्य संस्थान में अध्ययन कर रहे तीन फिजी छात्रों को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है।

बंगलौर में एक विदेशी छात्र द्वारा कथित तौर पर की गई हिट और रन दुर्घटना में एक स्थानीय महिला की मृत्यु के बाद उग्र हुई भीड़ से विदेशी छात्रों के प्रति बढ़ते खतरे को देखते हुए ये छात्र बहुत ही भयभीत है।

फिजी सन छात्र पत्रकार वती तलेबुला इन तीन छात्रों में से एक है। वह वर्तमान में पत्रकारिता और मनोविज्ञान में स्नातक की पढ़ाई कर रही है।

यह घटना जहाँ हुई है तलेबुला वहां से 10 मिनट की दूरी पर रहती है,उन्होंने कहा कि रविवार को स्थानीय भीड़ के कथित तौर पर उग्र हो जाने के बाद से वो घर से बाहर नहीं निकले थे।

उन्होंने कहा कि यह इतना गंभीर था कि दो अफ्रीकी महिलाओं को कथित तौर पर सड़क के बीच में निर्वस्त्र कर दिया गया, जबकि एक अन्य व्यक्ति को कथित तौर पर पीटा गया और वो गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती था।

स्थानीय लोगों के द्वारा वाहनों को रोक कर देखा जा रहा था कि कही कोई काले चमड़ी वाला विदेशी छात्र तो उसमे नहीं है।
“उनके द्वारा वाहनों को भी जलाया जा रहा था।”

तलेबुला ने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने विदेशी छात्रों को अगले दो दिनों तक घर के अंदर रहने के लिए और स्थिति के शांत होने का इंतजार करने की सलाह दी गई थी।

अर्थशास्त्र में स्नातक कर रही दूसरे वर्ष की छात्र रेबेका हीथ ने कहा कि “ऐसा पहली बार हुआ, जब से वे भारत में पहुंचे है।”

“हम स्थिति के शांत होने की उम्मीद लिए इंतज़ार कर रहे है,हम बंद दरवाजे के पीछे छिपे थे और अपने प्रियजनों को फिर कभी नहीं देख पाने का ख्याल आते ही हमारी आँखों में आँसू आ जाते थे।”

कम्प्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक कर रही दूसरे वर्ष की छात्रा मेरेओनी रवागा ने कहा कि”बहुत डर लग रहा है विशेष रूप से जब तब ऐसा कुछ घटित हो रहा है जिसका कभी भी अपने घर पर अनुभव नहीं किया हो।”

तलेबुला ने कहा कि “उनके आस-पास की स्थानीय दुकानें बंद थी और सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया है जहाँ उग्र भीड़ ने वाहनों को जला दिया था।”

लेख स्रोत/साभार – फिजीसन

  • Rakesh Manchanda

    With no new jobs getting created Bangalore like Gujarat and Kashmir is fast becoming a lab of hate and apartheid.