चिट फंड घोटाला: नरेंद्र मोदी और नवीन पटनायक पर गंभीर आरोप

अहमदाबाद: मंगलवार को आलोक जेना,चिट फंड घोटाले में एकमात्र याचिकाकर्ता, ने अरबों रुपयें के घोटाले की जांच में सीबीआई पर नरमी बरतने का आरोप लगाया।

जेना ने अहमदाबाद में चिट फंड घोटाले के शिकार लोगों को लामबंद करने के लिए एक अभियान चला रखा है। उन्होंने बताया कि गुजरात में चिट फंड कंपनियों के पीड़ितों की संख्या अधिकतम है, उसके बाद ओडिशा का नाम आता है।

ओडिशा से आने वाले सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए नोटिसों को “जानबूझकर नजरअंदाज किया है”, जिनमे राज्य में सक्रिय चिटफंड कंपनियों की संख्या,उनकी हिस्सेदारी और उनके अंतरराज्यीय संबंधों का ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

उनके अनुसार, गुजरात में घोटाले की वजह से 2012 के बाद 27 लोगों ने आत्महत्या की है।

जेना की जनहित याचिका के जवाब में ही सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2014 को चिटफंड घोटाले की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो को काम सौंपा था।

सीबीआई द्वारा बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद रामचंद्र हांसदा, बीजद के मुख्य सचेतक पर्वत त्रिपाठी, ओडिशा के एडवोकेट जनरल अशोक मोहंती की गिरफ्तारी और पूछताछ के लिए आठ मंत्रियों सहित 48 सत्ताधारी पार्टी नेताओं को समन किया गया था।

हालांकि,सामाजिक कार्यकर्ता ने कथित तौर पर सीबीआई अधिकारी एमके सिन्हा द्वारा सरोज साहू,ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी, की जांच के बाद रहस्यमय तरीके से जाँच को धीमी गति से चलाये जाने का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि साहू को सीबीआई के द्वारा रिहा किए जाने के बाद उसी शाम मुख्यमंत्री पटनायक दिल्ली के लिए रवाना हो गए और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की।दिल्ली में 12 दिनों तक एक फार्म हाउस में रहने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

उन्होंने आरोप लगाया कि पटनायक और मोदी के बीच बैठक के बाद सीबीआई के जांच अधिकारी सिन्हा को जांच से दूर कर दिया गया और उन्हें सीबीआई की तकनीकी शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, सीबीआई द्वारा 44 चिट फंड कंपनियों के खिलाफ जांच की जा रही है।

इनमें, पश्चिम बंगाल के शारदा ग्रुप और गुजरात की आस्था इंटरनेशनल सहित 11 कंपनियों के नाम है जिन्हें जेना ने सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया था।

जेना ने कहा “सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के जवाब में, मैं केवल 11 चिट फंड कंपनियों के नाम प्रस्तुत कर पाया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अपने नोटिस में देश के किसी भी नागरिक के द्वारा अन्य चिटफंड कंपनियों के नाम लाने के लिए गुंजाइश छोड़ी गई है जिनकी सीबीआई द्वारा जांच किए जाने की जरूरत है। (आईएएनएस)