बचपन में रोशनी खो देने वाली आयुषी अब कर रही हैं कानून में पीएचडी

जयपुर : “बार कांउसिल ऑफ राजस्थान से सनद लेकर बनी पहली विजुअली चैलेंज्ड फीमेल, लिम्का बुक में नाम दर्ज।”

कुछ कर गुजरने का जज्बा दिल में हो तो कोई भी कार्य नामुमकिन नही है। कुछ ऐसा ही करके दिखाया जयपुर जिले के बास्को गांव की बेटी “आयुषी” ने। बच्चपन में मां की ऊँगली पकड़ कर चलने वाली बेटी की ख्वाबों से भरी हुई आंखे चार साल की उम्र में बेनूर हो गई लेकिन सपने बेनूर नहीं हुए। आयुषी के हौसले इतने बुलंद थे की 22 साल की उम्र में ही बार कांउसिल ऑफ राजस्थान 2012 में सलेक्ट होने वाली पहली विजुअली चैलेंज्ड फीमेल बनी। जिसके कारण आयुषी का नाम 2014 में लिम्का बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। इन उपलब्धियों के चलते खेतड़ी का नाम भी रोशन हुआ। आयुषी की रोशनी चार साल की उम्र में ही चली गई। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी आयुषी के पिता जगदीश नारायण सिनेमा हॉल में ऑपरेटर पद पर कार्यरत थे वहीं मम्मी प्रेमलता पारीक महिला बाल विकास में सुपरवाईजर के पद पर कार्यरत थी। जयपुर में एक किराये के कमरे में रहकर अपना गुजर बसर कर रहे थे। अचानक चार साल की उम्र में आयुषी भेंगी देखने लगी, यह देख परिजनों ने दिल्ली में ईलाज करवाया। उपचार के दौरान आंखों में इनफेक्शन हो गया जिसके चलते अपनी दोनों आंखे खो दी। परिवार वालों को काफी चिंता सता रही थी लेकिन हिम्मत नही हारी। मध्यम परिवार की व विजुअली चैलेंज्ड होने के बावजूद भी आयुषी पारीक हमेशा कक्षा में टॉपर रही। राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी और एलएलएम किया। आयुषी ने बताया कि शुरू-शुरू में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मम्मी-पापा को हमेशा मेरी चिंता रहती थी यह देखकर निर्णय किया कि मैं कुछ बनकर दिखाऊ। आयुषी ने इस कमी को गॉड गिफ्ट मानकर आगे बढ़ने लगी। कामयाबी देखकर उनके माता-पिता ने भी उनका पूरा साथ दिया। ‘मम्मी सरकारी नौकरी में रहने के बावजूद भी रात-रात भर मेरे साथ जगकर मुझे प्रोत्साहित किया।’

“हाथ लगाकर बता देती है रूपए”

चार साल की उम्र में ही आयुषी की आंख की रोशनी बंद हो गई थी लेकिन हाथों का हुनर खत्म नहीं हुआ था। आयुषी के पिता ने बताया कि विजुअली होने के बावजुद भी बगैर किसी के सहारे घर का सारा काम कर लेती है। उन्होंने बताया कि आयुषी रूपए हाथ में लेकर बता देती है कि यह कितने का नोट है।

“11 साल की उम्र में की दसवीं”

आयुषी पारीक ने 11 साल की उम्र में ही प्राईवेट छात्रा के रूप में परीक्षा देकर दसवीं 77.17 प्रतिशत अंकों से पास की। आयुषी के पिता ने बताया कि चौथी कक्षा में तीन-चार दिनों तक स्कूल नहीं गई थी जिसके कारण स्कूल ने नाम काट दिया। जिसके बाद आयुषी स्कूल तो नहीं गई लेकिन घर पर ही पढ़ाई जारी रखी। 13 साल की उम्र में 72.62 प्रतिशत अंक लाकर 12वीं कक्षा कला वर्ग से व बीए 75.11 प्रतिशत अंकों से पास की।

“कई अवार्डो से नवाजा गया”

आयुषी पारीक को कई अवार्डो से नवाजा गया है। अायुषी की मम्मी प्रेमलता ने बताया कि 2006 में पारीक समाज ने गोल्ड मैडल देकर, 2007 में बाल दिवस के अवसर पर दिल्ली में पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका चौधरी ने नेशनल अवार्ड से, 2012 में पहली विजुअली चैलेंज्ड फीमेल कैंडीडेट बनी, जयपुर की महारानी पदमिनी द्वारा 2013 में अवार्ड से नवाजा गया।

वर्तमान में आयुषी राजस्थान विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा करायी जाने वाली राजस्थान प्रशासनिक और अधीनस्थ सेवा की प्रारंभिक परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली हैं और अब मुख्य परीक्षा के लिए तैयारी कर रही हैं।

संदीप तंवर  झुंझुनूं (राजस्थान)